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भारत विभाजन का दुखांत स्मरण

* महात्मा गांधी द्वारा देशवासियों  को वचन * क्रांतिकारियों का स्वप्न * देश की जनता का साथ  * महात्मा गांधी की मजबूरी  * जिन्ना का हट क्यों ? * विभाजन के बाद सिंध प्रांत की स्थिति * स्वयं सेवकों की भूमिका  * सीमावर्ती प्रांतों पर हिंदुओं की सुरक्षा  * भारत के साथ पाकिस्तान का धोखा  * नेहरू का हठ

आजादी के समय संघ की स्थिति

डॉ हेडगेवार जी युगान्तर और अनुशीलन समिति जैसे प्रमुख विप्लवी संगठनों में डॉ. पाण्डुरंग खानखोजे, श्री अरविन्द, वारीन्द्र कुमार घोष, त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती आदि के सहयोगी रहे। रासबिहारी बोस और शचीन्द्र सान्याल द्वारा प्रथम विश्वयुद्ध के समय 1915 में सम्पूर्ण भारत की सैनिक छावनियों में क्रान्ति की योजना में वे मध्यभारत के प्रमुख थे। उस समय स्वतंत्रता आंदोलन का मंच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस थी। उसमें भी उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई। 1921 और 1930 के सत्याग्रहों में भाग लेकर कारावास का दण्ड पाया। 1925 की विजयादशमी पर संघ स्थापना करते समय भी डा० हेडगेवार जी का उद्देश्य राष्ट्रीय स्वाधीनता ही था। संघ के स्वयंसेवकों को जो प्रतिज्ञा दिलाई जाती थी उसमें राष्ट्र की स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए तन-मन-धन पूर्वक आजन्म और प्रामाणिकता से प्रयत्नरत रहने का संकल्प होता था। संघ स्थापना के तुरन्त बाद से ही स्वयंसेवक स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका निभाने लगे थे। 1926-27 में जब संघ नागपुर और आसपास तक ही पहु...

शहीद वीर नारायण सिंह

* 1845 में पादरी हिस्लाप नागपुर क्षेत्र में धर्म प्रसार के लिए आया जिसने वनवासियों के लिए दवाखाना के नाम से सेवा प्रारंभ किया । मध्य प्रदेश और उड़ीसा में सक्रिय रहा। * 15 रजवाड़ों के प्रदेश में 116 जमीदार थे अधिक जमीदार इसलिए रखा था। कि लोग शासन की ओर से ग्रामों में भय व्याप्त करके रखेंगे , जिससे निश्चित टकोली सरकारी खजाने में जमा करते जाएं। * जहां सेना की छावनी होती थी , उसके निकट ही वेश्यावृत्ति करने वाली स्त्रियों को बसाया जाता था। * नागपुर दरबार को सिर्फ रुपया चाहिए था। छत्तीसगढ़ को पके वृक्ष का फल समझते थे , जब मन किया हिला दिया उतना उठा लिया । इस प्रकार का व्यवहार होता था, जनता को उपज का एक बहुत बड़ा भाग बेचकर कर के रूप में देना पड़ता था। छत्तीसगढ़ का अनाज नागपुर जाने लगा।  * अंग्रेज अधिकारी दौरे पर निकले तो जमीदारों से अपने क्षेत्र से वसूली करवाते थे अर्थात एक आर्थिक शोषण का युग प्रारंभ हो गया था। * चलाक व्यापारियों ने अनाज गोदाम में दबा दिए। * 1857 का विद्रोह यह सिपाही विद्रोह नहीं था । यह राष्ट्रीय विद्रोह था। अनेकों विद्वानों ने इसे सिपाही विद्रोह बता दिया वीर सावरकर के अ...