* 1845 में पादरी हिस्लाप नागपुर क्षेत्र में धर्म प्रसार के लिए आया जिसने वनवासियों के लिए दवाखाना के नाम से सेवा प्रारंभ किया । मध्य प्रदेश और उड़ीसा में सक्रिय रहा। * 15 रजवाड़ों के प्रदेश में 116 जमीदार थे अधिक जमीदार इसलिए रखा था। कि लोग शासन की ओर से ग्रामों में भय व्याप्त करके रखेंगे , जिससे निश्चित टकोली सरकारी खजाने में जमा करते जाएं। * जहां सेना की छावनी होती थी , उसके निकट ही वेश्यावृत्ति करने वाली स्त्रियों को बसाया जाता था। * नागपुर दरबार को सिर्फ रुपया चाहिए था। छत्तीसगढ़ को पके वृक्ष का फल समझते थे , जब मन किया हिला दिया उतना उठा लिया । इस प्रकार का व्यवहार होता था, जनता को उपज का एक बहुत बड़ा भाग बेचकर कर के रूप में देना पड़ता था। छत्तीसगढ़ का अनाज नागपुर जाने लगा। * अंग्रेज अधिकारी दौरे पर निकले तो जमीदारों से अपने क्षेत्र से वसूली करवाते थे अर्थात एक आर्थिक शोषण का युग प्रारंभ हो गया था। * चलाक व्यापारियों ने अनाज गोदाम में दबा दिए। * 1857 का विद्रोह यह सिपाही विद्रोह नहीं था । यह राष्ट्रीय विद्रोह था। अनेकों विद्वानों ने इसे सिपाही विद्रोह बता दिया वीर सावरकर के अ...