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हृदय परिवर्तन

गांव की एक खूबसूरत नवयुवती अपने दो साल के बच्चे को चिड़ियाघर घुमा रही थी।  वहीं पांच-सात कॉलेज के लड़के उसे बार-बार देखते हुए आपस में कुछ बातें कर रहे थे। वो उस खूबसूरत, अकेली देहाती युवती के पीछे हो लिए। युवती अपने बच्चे को कभी गोद में तो कभी उंगली पकड़े उसे बारी-बारी से जानवरों को दिखा रही थी। पीछे लगे आवारा लड़कों से बिल्कुल बेखबर... "चलती है क्या नौ से बारह" फिल्मी गाने गाते वो उसे कट मारकर अट्टहास करते आगे निकल गए। युवती ने उनपर ध्यान नहीं दिया। वो हिरन के बाड़े के पास अपने बच्चे को उन्हें दिखा रही थी। बच्चा चहकता हुआ उन्हें देख रहा था। आवारा लड़के उस युवती को घूर रहे थे। वो लड़के बगल में ही शेर के बाड़े के पास जोर से उसे देख फब्तियां कस रहे थे।  उनमें से एक लड़का पूरे जोश में था। बाड़े के ऊपर लगे ग्रिल पर बैठ भद्दे गाने गा रहा था। युवती बच्चे को लिए शेर को दिखाने बढ़ चली थी। युवती को देख ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसे उन लड़कों से तनिक भी भय नहीं या वो उन्हें अनदेखा अनसुना कर रही है, युवक अतिउत्साहित हो उठा। सभी ठहाके लगा रहे थे। युवती बाड़े के पास पहुंच चुकी थी। तभी बाड़े के ऊपर चढ़ा ल...

प्रयोग 1

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पृथ्वी दिवस 2023 - सोशल मीडिया टूलकिट सबका हिसाब है, और सबका हिसाब है, #InvestInourPlanet । पृथ्वी दिवस 2023 की थीम पृथ्वी दिवस में भाग लेने वाले 1 बिलियन से अधिक लोगों, सरकारों, संस्थानों और व्यवसायों को हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को पहचानने और सभी के लिए एक समान, समृद्ध हरित अर्थव्यवस्था में संक्रमण को गति देने में मदद करने पर केंद्रित है। हम बातचीत को फिर से शुरू करने, कार्रवाई में तेजी लाने और सभी को यह समझने के लिए एक साथ लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि अगर हम एक साथ काम करते हैं तो    यह हमारी पहुंच के भीतर है । चाहे आप वस्तुतः कार्रवाई कर रहे हों या व्यक्तिगत रूप से - आप पृथ्वी पर सबसे बड़े पर्यावरण आंदोलन में शामिल हो सकते हैं! आधिकारिक वेबसाइट:  पृथ्वी दिवस 2023 के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आधिकारिक विषय,  अपडेट  और कैसे शामिल हों, कृपया देखें:  https://www.earthday.org/earth-day-2023/ इसे साझा करें ईडीओ सोशल मीडिया हैंडल: ट्विटर: @EarthDay फेसबुक: @ EarthDay.org आईजी: @earthdaynetwork यूट्यूब: @EARTHDAYORG टिकटॉक: @...

प्रेरकप्रसंग इंजिनियर

एक ट्रेन द्रुत गति से दौड़ रही थी। ट्रेन अंग्रेजों से भरी हुई थी। उसी ट्रेन के एक डिब्बे में अंग्रेजों के साथ एक भारतीय भी बैठा हुआ था। डिब्बा अंग्रेजों से खचाखच भरा हुआ था। वे सभी उस भारतीय का मजाक उड़ाते जा रहे थे। कोई कह रहा था, देखो कौन नमूना ट्रेन में बैठ गया, तो कोई उनकी वेश-भूषा देखकर उन्हें गंवार कहकर हँस रहा था।कोई तो इतने गुस्से में था कि ट्रेन को कोसकर चिल्ला रहा था, एक भारतीय को ट्रेन मे चढ़ने क्यों दिया ? इसे डिब्बे से उतारो। किँतु उस धोती-कुर्ता, काला कोट एवं सिर पर पगड़ी पहने शख्स पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ा।वह शांत गम्भीर भाव लिये बैठा था, मानो किसी उधेड़-बुन मे लगा हो। ट्रेन द्रुत गति से दौड़े जा रही थी औऱ अंग्रेजों का उस भारतीय का उपहास, अपमान भी उसी गति से जारी था।किन्तु यकायक वह शख्स सीट से उठा और जोर से चिल्लाया "ट्रेन रोको"।कोई कुछ समझ पाता उसके पूर्व ही उसने ट्रेन की जंजीर खींच दी।ट्रेन रुक गईं। अब तो जैसे अंग्रेजों का गुस्सा फूट पड़ा।सभी उसको गालियां दे रहे थे।गंवार, जाहिल जितने भी शब्द शब्दकोश मे थे, बौछार कर रहे थे।किंतु वह शख्स गम्भीर मुद्रा में शां...

इजरायल

#यहूदी जब बेबीलोन में निर्वासित जीवन जी रहे थे तो वहां की नदियों के तट पर बैठकर #येरूशलम की ओर मुंह करके  रोते थे और विरह गीत गाते थे । उन्होंने वहां सौगंध ले ली कि हम तब तक कोई आनंदोत्सव नहीं मनाएंगे जब तक कि हमें हमारा येरुशलम और जियान पर्वत दोबारा नहीं मिल जाता । 50 सालों के निर्वासित जीवन में न कोई हर्ष, न गीत, न संगीत और सिर्फ़ अपनी मातृभूमि की वेदना... इसकी तुलना अपने देश की संततियों से कीजिये । जो #अफगानिस्तान से निकाले गए, जो #पाकिस्तान से निकाले गए, जो बांग्लादेश से निकाले गए, जो कश्मीर से निकाले गए, क्या उनके अंदर अपनी उस भूमि के लिए कोई वेदना है ? इन निर्वासितों की किसी संस्था को अखंड भारत के लिए कोई कार्यक्रम करते देखा या सुना है ? अपने छोड़े गए शहर, पहाड़, नदी आदि की स्मृति को क्या उन्होंने किसी रूप में संजोया हुआ है ? क्या कोई विरह गीत ये अपनी उस खो गई भूमि के लिए गाते हैं ? क्या अपनी #संततियों को समझाते हैं कि उनके दादा-पड़दादा को क्यों, कब और किसने कहाँ से निकाला था ? मैं ये नहीं कहता कि इनमें से सब ऐसे ही हैं पर जो ऐसे हैं वो बहुसंख्यक में हैं या फिर मान लीजिये कि कल क...

महावीर

🚩🚩भगवान महावीर के प्रसंग:- अहिंसा का उपदेश देने वाले भगवान महावीर से सभी परिचित हैं। एक बार भगवान महावीर एक गाँव में उपदेश देने गए। उन्हें वहाँ से दूसरे स्थान पर जाना था। रास्ता बीहड़ जंगल में से था, जिसमें एक विषैला सांप रहता था। वह उस मार्ग से आने-जानेवालों का काटता था। गाँववालों ने भगवान महावीर से कहा- "प्रभु, इस मार्ग से न जाएँ, वह खूँखार सर्प आपको दंश किए बिना नहीं रहेगा।" भगवान महावीर तो महावीर थे। उस मार्ग पर अकेले चल दिए। सांप आया, उसने अपनी फुत्कार छोड़ी, परन्तु भगवान पर इसका कोई असर नहीं हुआ। सांप को भी आश्चर्य हुआ, उसने सोचा जरूर यह कोई अद्वितीय शक्ति है। भगवान से सर्प ने पूछा- "क्यों मनुष्यों को कष्ट दे रहे हो? दूसरों को कष्ट पहुँचाना तो अनुचित है।" सांप समझ गया। भगवान ठीक-ठाक दूसरे गाँव पहुँचे तो लोगों को आश्चर्य हुआ। पूछने लगे "क्या सांप ने आपको काटा नही?" भगवान ने बताया कि सांप तो अच्छे स्वभाववाला है। इक्का-दुक्का लोग उस मार्ग से जाने लगे। उन्होंने देखा सांप शान्त लेटा हुआ अब किसी को कोई कष्ट नहीं देता। बच्चे भी उधर से आने-जाने लगे। किसी न...

सुब्रमणियम भारती

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चर्चा में क्यों? हाल ही में उपराष्ट्रपति ने महाकवि ‘सुब्रमण्यम भारती’ को उनकी 100वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रमुख बिंदु जन्म:  सुब्रमण्यम भारती का जन्म 11 दिसंबर, 1882 को मद्रास प्रेसीडेंसी के ‘एट्टायपुरम’ में हुआ था। संक्षिप्त परिचय:  वे राष्ट्रवादी काल (1885-1920) के भारतीय लेखक थे, जिन्हें आधुनिक तमिल शैली का जनक माना जाता है। उन्हें  'महाकवि भारथियार'  के नाम से भी जाना जाता है। सामाजिक न्याय को लेकर उनकी मज़बूत भावना ने उन्हें आत्मनिर्णय और सम्मान हेतु लड़ने के लिय प्रेरित किया। राष्ट्रवादी काल के दौरान भागीदारी: वर्ष 1904 के बाद वह तमिल दैनिक समाचार पत्र  ‘स्वदेशमित्रन’  से जुड़ गए। राजनीतिक मामलों के साथ उनके इस जुड़ाव के कारण वे जल्द ही  ‘भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस’ (INC)  के चरमपंथी विंग का हिस्सा बन गए। सुब्रमण्यम भारती ने अपने क्रांतिकारी विचारों का प्रचार करने हेतु लाल कागज़ पर 'इंडिया' नाम का साप्ताहिक समाचार पत्र छापा। यह तमिलनाडु में राजनीतिक कार्टून प्रकाशित करने वाला पहला पेपर था। उन्होंने ‘विजय’ जैसी कुछ अन्य पत्रिकाओं...

गोपबंधु दास

गोपबंधु दास की जीवनी 10 पंक्तियाँ 1) गोपबंधु दास को उत्कलमणि के नाम से जाना जाता है। 2) वह एक स्वतंत्रता सेनानी, एक समाज सुधारक और एक महान कवि थे।  3) गोपबंधु दास का जन्म 9 अक्टूबर  1876 को पुरी जिले के सुआंडो में हुआ था। 4) दैतारी दास और स्वर्णमयी दास उनके माता-पिता थे। 5) गोपबंधु दास ने कम उम्र में ही अपनी माँ को खो दिया और कॉलेज की अवधि में गोपबंधु दास के पिता को भी खो दिया। 6) उन्होंने अपनी शिक्षा अपने गाँव के स्कूल में शुरू की। 7) गोपबंधु दास की शादी 12 साल की उम्र में हुई थी। 8) उन्होंने कोलकाता में कानून की पढ़ाई की थी। 9) गोपबंधु दास गरीबों के प्रति बहुत दयालु थे। 10) उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को चावल और कपड़े बांटे। गोपबंधु दास की जीवनी पर अधिक 5 पंक्तियाँ 11) गोपबंधु दास सत्यबाड़ी बाना विद्यालय के संस्थापक थे। 12) दैनिक समाचार पत्र 'समाज' की स्थापना गोपबंधु दास ने की थी। 13) स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार कैद किया गया था। 14) गोपबंधु दास ने ढेर सारी कविताएँ लिखीं। 15) गोपबंधु दास ओडिशा के एक योग्य पुत्र थे। गोपबंधु दास पर नि...