महावीर

🚩🚩भगवान महावीर के प्रसंग:-

अहिंसा का उपदेश देने वाले भगवान महावीर से सभी परिचित हैं। एक बार भगवान महावीर एक गाँव में उपदेश देने गए। उन्हें वहाँ से दूसरे स्थान पर जाना था। रास्ता बीहड़ जंगल में से था, जिसमें एक विषैला सांप रहता था। वह उस मार्ग से आने-जानेवालों का काटता था। गाँववालों ने भगवान महावीर से कहा- "प्रभु, इस मार्ग से न जाएँ, वह खूँखार सर्प आपको दंश किए बिना नहीं रहेगा।" भगवान महावीर तो महावीर थे। उस मार्ग पर अकेले चल दिए। सांप आया, उसने अपनी फुत्कार छोड़ी, परन्तु भगवान पर इसका कोई असर नहीं हुआ। सांप को भी आश्चर्य हुआ, उसने सोचा जरूर यह कोई अद्वितीय शक्ति है। भगवान से सर्प ने पूछा- "क्यों मनुष्यों को कष्ट दे रहे हो? दूसरों को कष्ट पहुँचाना तो अनुचित है।" सांप समझ गया। भगवान ठीक-ठाक दूसरे गाँव पहुँचे तो लोगों को आश्चर्य हुआ। पूछने लगे "क्या सांप ने आपको काटा नही?" भगवान ने बताया कि सांप तो अच्छे स्वभाववाला है। इक्का-दुक्का लोग उस मार्ग से जाने लगे। उन्होंने देखा सांप शान्त लेटा हुआ अब किसी को कोई कष्ट नहीं देता। बच्चे भी उधर से आने-जाने लगे। किसी ने सांप को कंकड़-पत्थर मारा, फिर भी सांप शान्त रहा। तब ज्यादा पत्थर पड़े। सांप लहू-लुहान हो गया, फिर भी चुपचाप पड़ा रहा। कुछ दिनों बाद भगवान महावीर उसी मार्ग से निकले। देखा कि सांप आहत स्थिति में पड़ा हुआ है। उन्होंने पूछा- "यह हालत कैसे हुई?" सांप ने कहा- "भगवन्, मैंने आपके उपदेश- अहिंसा का पालन किया, देखिए मेरी क्या हालत हो गई।" भगवान ने कहा- "भाई, मैंने तो काटने को मना किया था, फुत्कारने से नहीं। फुत्कारना तो चाहिए।" सांप फिर से फुत्कारने लगा। लोग सहम गए। कोई उसके पास फटकता नहीं था। परन्तु वह किसी को कष्ट नहीं देता था।

हम किसीको मारने जाते नहीं। लेकिन कोई मारने आए तो हमारे पास फुत्कारने की शक्ति होनी चाहिए। इसी शक्ति का संयोजन हम कर रहे हैं। हिन्दू चिन्तन के आधार पर समाज जीवन के हर क्षेत्र को समृद्ध करने का हम प्रयत्न कर रहे हैं।

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