संदेश

फ़रवरी, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रेरक प्रसंग

एक *चूहा* एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था। एक दिन *चूहे* ने देखा कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है। उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक *चूहेदानी* थी। ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर *कबूतर* को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है। कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है? निराश चूहा ये बात *मुर्गे* को बताने गया। मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा… जा भाई.. ये मेरी समस्या नहीं है। हताश चूहे ने बाड़े में जा कर *बकरे* को ये बात बताई… और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा। उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई, जिस में एक ज़हरीला *साँप* फँस गया था। अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस कसाई की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डस लिया। तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने हकीम को बुलवाया। हकीम ने उसे *कबूतर* का सूप पिलाने की सलाह दी। कबूतर अब पतीले में उबल रहा था। खबर सुनकर उस कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उसी *मुर्गे* को काटा गया। कुछ दिनों बाद उस...

श्रद्धा

जब हम किसी व्यक्ति में जनसाधारण से विशेष गुण या शक्ति का दर्शन करते हैं तो उसके प्रति एक आनंद युक्त आकर्षण पैदा होता है हमें यह आकर्षण उसके महत्व को स्वीकार करने के साथ हमने उसके प्रति पूज्य भाव भी पैदा करता है इस प्रक्रिया का नाम ही श्रद्धा है।  श्रद्धा का अर्थ है--”सत्य में धारण करना”। ”श्रत्” अर्थात् सत्य, ”धा” अर्थात् ”धारण करना।” संसार की प्रत्येक वस्तु का विकास सत्य की तरफ है। यह विश्वास कि संसार के प्रवाह की दिशा ”सत्य” की तरफ है, असत्य की तरफ नहीं। ३. कोई भी व्यक्ति वही होता है, वैसा ही बनता चला जाता है, जैसी उसकी श्रद्धा होती है।अपनी बुद्धि और स्वयं की  सक्रियता श्रद्धा के ही अनुगामी होते हैं। श्रद्धा मानव जीवन का नीव है जैसे उसकी श्रद्धा होती है वैसा ही उसका व्यक्तित्व बनता है गीता के अनुसार :- श्रद्धामयोऽयं पुरुष: मनुष्य स्वभाव से ही श्रद्धावान है। जिस प्रकार सूर्य के बिना दिन नहीं होता आंखों के बिना देखा नहीं जा सकता उसी प्रकार श्रद्धा के बिना जीवन गति में नहीं हो सकता। श्रद्धा ही सत्य का साक्षात्कार कराती है श्रद्ध्या सत्यमाप्यते - श्रद्धा से सत्य की प्राप्ति होती...

उपनिषद गंगा

https://youtube.com/playlist?list=PLm6DKuwwu5zru7Y0K55cpm2EF91JlEl0M