एकात्मता श्री अरविंद
15 अगस्त अट्ठारह सौ बहत्तर सावन मास में गोकुल अष्टमी के दिन श्री अरविंद का जन्म हुआ आरो उनका उपनाम था अरविंद की आयु मात्र 5 वर्ष थी उस समय तीनों बालकों को साथ लेकर डॉक्टर कृष्णन घोष सपरिवार लंदन चले आए थे अरविंद की शिक्षा के लिए एक ईसाई आचार्य के पास रखा गया था जो भी पढ़ाया जाता था उसे अरविंद तुरंत आत्मसात कर लेता था 2 साल के बाद अरविंद को सेंड बाल विद्यालय में दाखिल किया गया वह अत्यंत मेधावी छात्र के नाते जाना जाता प्रधानाध्यापक भी अरविंद की बुद्धिमता से प्रभावित हुए और सीधे दूसरी कक्षा में प्रवेश दिया उन्हें क्रीक और लाठी सीखने का दायित्व स्वयं ने स्वीकार किया विश्व के घर में निवास से कारण अरविंद को रविवार को चर्च जाना पड़ता था कहते हैं कि पादरी ने अरविंद के शरीर पर जल छिड़का और सभी ने तालियां बजाकर कहा कि हां पवित्रा हुआ और उनकी मान्यता अनुसार वह ईसाई मत की दीक्षा ले लिए थे अरविंद को इसका ध्यान बाद में आया उस समय उसकी आयु 10 वर्ष की थी जब यह बात पिता को बताया तो उनके पिताजी ने विशाल को एक ही भाषा में पत्र लिखकर कहा कि उनके बच्चों पर इसी प्रकार के धर्म थोपने की चेष्टा ना हो वह ज...