शहीद गुंडाधुर
गुंडाधुर नेता नार गांव के रहने वाले थे उनका मूल नाम सोमारू था बचपना गांव में ही जंगलों पहाड़ों और नदियों के बीच में पला बढ़ा बचपन से ही निडर साहसी और परिश्रमी थे घने जंगलों में अकेले चले जाना जंगलों में शिकार करने चले जाना या उनके निडरता की पहचान थी वह तरुण अवस्था में बलिष्ठ शरीर फौलादी शरीर के थे धनुष बाण चलाने में महारत हासिल था उनका निशाना अचूक था इनकी धनुष विद्या की चर्चा पूरे क्षेत्र में होने लगी थी जिसके कारण आसपास के कई गांव में उनकी विशेष पहचान हो गई थी गांव गांव में उनके दोस्त बन रहे थे जो आगे चलकर उनके सहयोगी बने बंधुओं एक कहावत बस्तर के बारे में चलता है कि बस्तर की भूमि जादू टोना की भूमि है या सत्य भी है क्योंकि पहले गांव में रुकना खतरा माना जाता था लोग इस कारण भय भूत रहते थे सबसे बड़ा कारण रहा यहां बलि प्रथा की यहां पशु पक्षियों के साथ ही नरबलि की परख आ रही शहीद गुंडाधुर मंत्र तंत्र जादू टोना में महारत हासिल थी कहते हैं कि जब अंग्रेजों ने बंदूक चलाने चाहा तो उनके बंदूक से गोली नहीं पानी निकलता था गुंडाधुर एक पेड़ में दिखाई देते थे तो दूसरे ही क्षण दूसरे पेड़ में दिखाई देते ...