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दीनदयाल उपाध्याय

श्रीमान् मामाजी सादर प्रणाम ! आपका पत्र मिला। देवी की बीमारी का हाल जानकर दुःख हुआ। आपने अपने पत्र में जो कुछ भी लिखा सो ठीक ही लिखा है। इसका क्या उत्तर दूँ, यह मेरी समझ में नहीं आता। परसों आपका पत्र मिला, तभी से विचारों का एवं कर्तव्यों का तुमुल युद्ध चल रहा है। एक ओर तो भावना और मोह खींचते हैं तो दूसरी ओर पुरखों की आत्माऐं पुकारती है। आपके लिखे अनुसार पहिले तो मेरा भी यही विचार था कि मैं किसी स्कूल में नौकरी कर लूंगा तथा साथ ही वहाँ का संघ कार्य भी करता रहूँगा। यही विचार लेकर में लखनऊ आया था परन्तु लखनऊ में आजकल की परिस्थिति तथा आगे कार्य का असीम क्षेत्र देख कर मुझे यही आज्ञा मिली कि बजाय एक नगर में कार्य करने के एक जिले में कार्य करना होगा। इस प्रकार सोते हुए हिन्दू समाज से मिलने वाले कार्यकर्ताओं की कमी को पूरा करना होता है। सारे जिले में काम करने के कारण न तो एक स्थान पर दो चार दिन से अधिक ठहराव संभव है और न किसी भी प्रकार की नौकरी। संघ के स्वयंसेवक के लिये पहला स्थान समाज और देश के कार्य का रहता है। और फिर अपने व्यक्तिगत कार्यों का। अतः मुझे समाज कार्य के लिये जो आज्ञा मिली थी, उ...

सोशल मीडिया और युवा

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सोशल मीडिया और युवा  हाल ही में, इंस्टाग्राम और इसकी पैरेंट कंपनी फेसबुक को तब सार्वजनिक रोष का सामना करना पड़ा, जब कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि उनके उपयोग का युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। फेसबुक के ‘व्हिसल ब्लोअर’ फ्रांसेस हौगेन (Frances Haugen) ने भी यह खुलासा किया कि बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की तुलना में लाभ को उच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसने युवाओं पर ऐसे सोशल मीडिया ऐप्स और वेबसाइटों के प्रभाव को उजागर किया है। सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभाव संपर्क और संबंध:  फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया मंच किशोरों और युवा वयस्कों को अपनेपन और स्वीकृति की एक भावना प्रदान करते हैं। यह बात LGBTQ जैसे समूहों के लिये विशेष रूप से सत्य है, जो अलग-थलग या हाशिये पर मौजूद हैं।     कोरोना महामारी के दौरान इसका चौतरफा प्रभाव स्पष्ट तौर पर नज़र आया जब इसने ‘आइसोलेशन’ में रह रहे लोगों और प्रियजनों को आपस में जोड़े रखा।  सकारात्मक प्रेरणा:  सोशल नेट...

ईसाईA1

ईसाइयों के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित चार प्रमुख प्रकार शामिल होते हैं: 1. कैथोलिक: कैथोलिक ईसाइयों का मुख्य धर्म है रोमन कैथोलिक धर्म, जिसका मुख्यालय वेटिकन सिटी में है। 2. प्रोटेस्टेंट: प्रोटेस्टेंट ईसाइयों का मुख्य धर्म है प्रोटेस्टेंटिज्म, जिसमें कई अलग-अलग समुदाय और धाराएँ होती हैं, जैसे कि लुथरवाद, आंगलिकन, प्रेस्बिटेरियन, बैपटिस्ट, आदि। 3. ओर्थोडॉक्स: ओर्थोडॉक्स ईसाइयों का मुख्य धर्म होता है ओर्थोडॉक्सी, जिसके अंतर्गत यूनानी ओर्थोडॉक्स और रूसी ओर्थोडॉक्स समुदाय शामिल होते हैं। 4. पौराणिक: पौराणिक ईसाइयों का मुख्य धर्म है यहूदी धर्म, जो तोराह के अनुसार होता है। इन प्रमुख प्रकारों के अलावा, दुनिया भर में छोटे और बड़े समुदायों के साथ-साथ अन्य ईसाई समुदाय भी हैं, जिनमें विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक प्रथाएँ होती हैं।