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जनजाति विषय पांचवी अनुसूची

*पांचवी अनुसूची का गलत अर्थ प्रचारित करना यह सोची समझी साजिश*                                                             पिछले कुछ वर्षों से यह अनुभव हो रहा है कि जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में आदिवासी गैर आदिवासी विवाद भड़काने इसका उपयोग किया जा रहा है इससे समाज का दोहरा नुकसान होता है 👉1. अनुसूचित जाति आदिवासी समाज को लगता है कि हमारे अधिकारों को गैर जनजाति छीन रहे हैं ।👉2 . गैर जनजाति समाज को लगता है कि पांचवी    अनुसूची उनके विरोध में है ।          *पांचवी अनुसूची क्षेत्र याने क्या* .....? ब्रिटिश अवधि के दौरान जिन क्षेत्रों में जनजाति मुख्य रूप से बसे हुए थे, अनुसूचित जिला अधिनियम 18 74 और गवर्नमेंट ऑफ इंडिया *(Excluded and Partially Excluded Araias) Order 1936* के द्वारा अप वर्जित आंशिक से बहिष्कृत क्षेत्र घोषित किए गए । बाद में आजादी के बाद , राष्ट्रपति इन क्षेत्रों को पांचवी और छठी अनुसूची क...

जनजाति विषय

*अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों का विस्तार" अर्थात, (Panchayat Extension to Schedule Area)*  *पेसा (PESA) कानून -- 1996* भारतीय संविधान में 73 वे संविधान संशोधन से पंचायत राज कानून देश में प्रारंभ हुआ। उसमें जिला पंचायत, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत ऐसी त्रिस्तरीय रचना हुई। संविधान की पांचवी अनुसूची के क्षेत्रों में दिए हुए अधिकार एवं जनजाति समाज की रूढ़ि एवं परंपरागत ग्रामसभा की रचना को देखते हुए, स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया जी के अध्यक्षता में एक कमेटी नियुक्त हुई। उस कमेटी का प्रवास देश भर के जनजाति क्षेत्र में हुआ। उस समय कल्याण आश्रम के कार्यकर्ता भी उनके साथ थे। उनके प्रवास के पश्चात भूरिया कमेटी के सुझावों के अनुसार ग्राम पंचायत को जनजाति क्षेत्र में पारा/ टोला/ फलिया के अनुरुप चौथे स्तर की ग्रामसभा करने का निर्णय हुआ, और अनुसूचित क्षेत्र में पंचायतों का विस्तार अर्थात PESA (Panchayat Extension to Schedule Area) पेसा कानून 1996 में पारित हुआ एवं 1 जनवरी 1997 से देशभर मे लागू हुआ।  इस कानून में मुख्य दो बातें है। ~~~~~~~~~~~~~~~ 👉1.पहली महत्व की बात यह है कि जनजाति क्षे...