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जुलाई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पौराणिक विज्ञान

रात्रि के अंतिम प्रहर में एक बुझी हुई चिता की भस्म पर अघोरी ने जैसे ही आसन लगाया, एक प्रेत ने उसकी गर्दन जकड़ ली और बोला- मैं जीवन भर विज्ञान का छात्र रहा और जीवन के उत्तरार्ध में तुम्हारे पुराणों की विचित्र कथाएं पढ़कर भ्रमित होता रहा।  यदि तुम मुझे पौराणिक कथाओं की सार्थकता नहीं समझा सके तो मैं तुम्हे भी इसी भस्म में मिला दूंगा। अघोरी बोला- एक कथा सुनो, रैवतक राजा की पुत्री का नाम रेवती था। वह सामान्य कद के पुरुषों से बहुत लंबी थी, राजा उसके विवाह योग्य वर खोजकर थक गये और चिंतित रहने लगे। थक-हारकर वो योगबल के द्वारा पुत्री को लेकर ब्रह्मलोक गए।  राजा जब वहां पहुंचे तब गन्धर्वों का गायन समारोह चल रहा था, राजा ने गायन समाप्त होने की प्रतीक्षा की। गायन समाप्ति के उपरांत ब्रह्मदेव ने राजा को देखा और पूछा- कहो, कैसे आना हुआ? राजा ने कहा- मेरी पुत्री के लिए किसी वर को आपने बनाया अथवा नहीं ? ब्रह्मा जोर से हंसे और बोले- जब तुम आये तब तक तो नहीं, पर जिस कालावधि में तुमने यहाँ गन्धर्वगान सुना उतनी ही अवधि में पृथ्वी पर 27 चतुर्युग बीत चुके हैं और 28 वां द्वापर समाप्त होने वाला है, अब...

शिक्षा व शिक्षक

 अब्दुल कलाम साहब का नाम जब भारत के राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया और उनके शपथ ग्रहण की तिथि तय हो गई तो प्रोटोकाल व व्यवस्था में लगे एक अधिकारी ने उनसे पूछ- सर, आपके शपथ ग्रहण समारोह में आपके परिवार और मित्रों में से किन किन को बुलाना है, लिखवाइए। कलाम साहब बोले- नाम तो याद नहीं हैं पर जिन-जिन शिक्षकों ने मुझे प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाया है उन सभी को ससम्मान समारोह में बुलाया जाए। फिर क्या था कलाम साहब जिस स्कूल में पढ़े वहां का रिकार्ड ढूंढा गया। शिक्षकों की खोज की गई और जो जीवित थे उन्हें संबंधित जिला कलेक्टर ने विशेष हेलिकॉप्टर अथवा वायुयान से उन्हें दिल्ली पहुंचाया और उन शिक्षकों के निजी सहायक के रूप में संबंधित जिला कलेक्टर स्वयं साथ रहे। किसी देश का बौद्धिक विकास उस देश के योग्य शिक्षकों पर निर्भर करता है। वह शिक्षक वर्ग ही है जो समाज को परिवर्तित करने का हुनर रखता है।

मोबाइल का गुलाम

राजू आज बहुत उदास था। आज उसके हाथ से गिरने की वजह से मोबाईल की स्क्रीन टूट गई थी। शोरूम वाले ने उसे कल तक ठीक करके देने के लिए बोला है। क्या करूं टाइम ही पास नही हो रहा.. "राजू ओ राजू..अन्दर से मां ने आवाज लगाई तो राजू "आया मां..कहकर उठकर चल दिया पिछले तीन चार साल में शायद यह पहला अवसर था जब मां की एक आवाज पर राजू ने जवाब दिया हो.. "बोलो मां.."बेटा आज घर में सब्जी नही है सुबह पानी की मोटर ने पानी देर से उठाया बेटा इसलिए मैं तेरी मौसी(बगल वाली आंटी) के साथ सब्जी लेने नही जा पाई  मेरा प्यारा बेटा..मेरा राजा बेटा..मेरा ये काम कर दे ना बेटा..मां ने लगभग मनुहार करते हुए कहा... 'खाली बैठने से अच्छा है चलो आज बाजार ही घूम आता हूं,.. मनही मन मैने सोचा "अच्छा बताओ क्या लाना है...? मां के मुखमंडल पर एक नई सी चमक थी..मां ने सब्जी की लिस्ट और थैला मुझे थमा दिया। बाजार जा रहे हो बेटा..ठहरो मैं भी चलता हूं दादा जी ने छड़ी उठाते हुए कहा "हां दादाजी चलिए...."बेटा मेरा ये चश्मा टूट गया है काफी दिन हो गए तुम्हारे पापा को तो आफिस से टाइम नही लगता तुम ही ठीक करवाकर ला...

सच्चा इंसान कमजोरी का साथ देता है

एक बार एक व्यक्ति की उसके बचपन के टीचर से मुलाकात होती है । वह उनके चरण स्पर्श कर अपना परिचय देता है। वे बड़े प्यार से पुछती है, 'अरे वाह, आप मेरे विद्यार्थी रहे है, अभी क्या करते हो, क्या बन गए हो ?' मैं भी एक टीचर बन गया हूं ' वह व्यक्ति बोला,' और इसकी प्रेरणा मुझे आपसे ही मिली थी जब में 7 वर्ष का था।' उस टीचर को बड़ा आश्चर्य हुआ, और वे बोली कि,' मुझे तो आपकी शक्ल भी याद नही आ रही है, उस उम्र में मुझसे कैसी प्रेरणा मिली थी ??' वो व्यक्ति कहने लगा कि .... 'यदि आपको याद हो, जब में चौथी क्लास में पढ़ता था, तब एक दिन सुबह सुबह मेरे सहपाठी ने उस दिन उसकी महंगी घड़ी  चोरी होने की आपसे शिकायत की थी। आपने क्लास का दरवाज़ा बन्द करवाया और सभी बच्चो को क्लास में पीछे एक साथ लाइन में खड़ा होने को कहा था। फिर आपने सभी बच्चों की जेबें टटोली थी। मेरे जेब से आपको घड़ी मिल गई थी जो मैंने चुराई थी। पर चूंकि आपने सभी बच्चों को अपनी आंखें बंद रखने को कहा था तो किसी को पता नहीं चला कि घड़ी मैंने चुराई थी। टीचर उस दिन आपने मुझे लज्जा व शर्म से बचा लिया था। और इस घटना के बाद कभी भ...

💐💐कड़वा वचन💐💐

सुंदर नगर में एक सेठ रहते थे। उनमें हर गुण था- नहीं था तो बस खुद को संयत में रख पाने का गुण। जरा-सी बात पर वे बिगड़ जाते थे। आसपास तक के लोग उनसे परेशान थे। खुद उनके घर वाले तक उनसे परेशान होकर बोलना छोड़ देते। किंतु, यह सब कब तक चलता। वे पुन: उनसे बोलने लगते। इस प्रकार काफी समय बीत गया, लेकिन सेठ की आदत नहीं बदली। उनके स्वभाव में तनिक भी फर्क नहीं आया। अंततः एक दिन उसके घरवाले एक साधु के पास गये और अपनी समस्या बताकर बोले- “महाराज ! हम उनसे अत्यधिक परेशान हो गये हैं, कृपया कोई उपाय बताइये।” तब, साधु ने कुछ सोचकर कहा- “सेठ जी ! को मेरे पास भेज देना।” “ठीक है, महाराज” कहकर सेठ जी के घरवाले वापस लौट गये। घर जाकर उन्होंने सेठ जी को अलग-अलग उपायों के साथ उन्हें साधु महाराज के पास ले जाना चाहा। किंतु, सेठ जी साधु-महात्माओं पर विश्वास नहीं करते थे। अतः वे साधु के पास नहीं आये। तब एक दिन साधु महाराज स्वयं ही उनके घर पहुंच गये। वे अपने साथ एक गिलास में कोई द्रव्य लेकर गये थे। साधु को देखकर सेठ जी की प्योरिया चढ़ गयी। परंतु घरवालों के कारण वे चुप रहे। साधु महाराज सेठ जी से बोले- “सेठ जी ! मैं हि...

गुरुपूजन

1. मनुष्य को जब किसी व्यक्ति से राग याने मोह हो जाता है, तो उसके याने उसका अवगुण दिखाई नही देते हैं। और जब मनुष्य को किसी से द्वेष हो जाता है, तो उसे उसके गुण दिखाई नही देते है संगठक को राग और द्वेष से मुक्त होना हैं विरागी होना है, गुरु भगवा हमें विरागी होने की प्रेरणा देती है। उदा:- डा.हेडगेवार 2. संगठन का निर्णय ही अपनी इच्छा मानकर कार्य करने वाला ही समर्पित कार्यकर्ता कहलाता है। विश्वास का अगला चरण श्रद्धा है। श्रद्धा से ही समर्पण का भाव जाग्रत होता हैं। कार्य की पूर्णता के लिए समर्पण भाव जाग्रत होना भावश्यक हैं। श्रद्धा जनित समर्पण स्थाई एवं रचनात्मक होता है- यही समर्पण की प्रेरणा हम भगवा ध्वज से लेते हैं। उदा:- एकनाथ रानडे, पं. दीनदयाल उपाध्याय 3. योग्यता समर्पित कार्यकर्ता का लक्षण नहीं। बुद्धिमान है योग्य है। अच्छे, लेखक, अमीर, कर्तृत्ववान लेकिन संगठन के निर्णय के बाद भी कुछ और अपनी बुद्धि से सोचता है वह समर्पित नही, उससे संघ का लक्ष्य साध नही सकते है। प.पू. गुरुजी विद्वान थे, २००० पुस्तक पढ़े थे, प्राध्यापक थे लेकिन जैसे अखंडानंद जी के शिष्य बने वे सबकुछ भूल गये। वर्तन धोने का ...

विचारधारा

"हाइजैक कांग्रेस"  व्यक्ति का, जहाज का अपहरण के बारे में आपने सुना है लेकिन एक राजनैतिक पार्टी का अपहरण कैसे?  भारत में राज करने के लिए यदि नई पार्टी बनाई जाए तो पूरे भारत मे इसको स्थापित करने में 50 साल लग जाये या फिर ऐसी पार्टी जो पूरे भारत मे पहले से स्थापित है उस पर कब्जा कर लिया जाए । स्वभाविक रूप से दूसरा विकल्प ज्यादा  बेहतर है क्योंकि इससे कम समय व कम मेहनत में लक्ष्य की प्राप्ति हो जाएगी । देश की राजनीति में कॉल मार्क्स का वर्ग संघर्ष का का सिद्धांत सफलं नही हो पाया बल्कि वर्तमान समय में वे सिमटते जा रहे है यहाँ तक कि उनका सशस्त्र संगठन नक्सली ( कम्युनिस्ट आतंकवादी)  भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है । यही कारण है कि कांग्रेस में आई बौद्धिक शून्यता व इच्छा शक्ति की कमी के कारण ये लोग अपना प्रभुत्व स्थापित कर रहे वो भी गांधी परिवार के आशीर्वाद से ?  कैसे?  AISA - " आल  इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन "    22अप्रैल 1969 को रूसी नेता लेनिन के जन्मदिन पर ( विदेश से नेता व विचार आयात ) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) बनाई गई...