विचारधारा

"हाइजैक कांग्रेस" 

व्यक्ति का, जहाज का अपहरण के बारे में आपने सुना है लेकिन एक राजनैतिक पार्टी का अपहरण कैसे? 
भारत में राज करने के लिए यदि नई पार्टी बनाई जाए तो पूरे भारत मे इसको स्थापित करने में 50 साल लग जाये या फिर ऐसी पार्टी जो पूरे भारत मे पहले से स्थापित है उस पर कब्जा कर लिया जाए ।
स्वभाविक रूप से दूसरा विकल्प ज्यादा  बेहतर है क्योंकि इससे कम समय व कम मेहनत में लक्ष्य की प्राप्ति हो जाएगी ।
देश की राजनीति में कॉल मार्क्स का वर्ग संघर्ष का का सिद्धांत सफलं नही हो पाया बल्कि वर्तमान समय में वे सिमटते जा रहे है यहाँ तक कि उनका सशस्त्र संगठन नक्सली ( कम्युनिस्ट आतंकवादी)  भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है ।
यही कारण है कि कांग्रेस में आई बौद्धिक शून्यता व इच्छा शक्ति की कमी के कारण ये लोग अपना प्रभुत्व स्थापित कर रहे वो भी गांधी परिवार के आशीर्वाद से ? 
कैसे? 
AISA - " आल  इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन " 
 
22अप्रैल 1969 को रूसी नेता लेनिन के जन्मदिन पर ( विदेश से नेता व विचार आयात ) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) बनाई गई  क्योंकि नक्सली आंदोलन का जनक चारु मजूमदार मारा गया था ।
ये कम्युनिस्ट आतंकवादियों ( नक्सलियों)  का राजनैतिक चेहरा है इसी का स्टूडेंड विंग है AISA जो विश्वविद्यालय व कॉलेज में सक्रिय है ।JNU जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में ये बहुत एक्टिव है और अधिकतर अध्यक्ष इसी संगठन के रहे है ।
आइए थोड़ा इनके विचार और कर्म(कु) के बारे में जान ले ।ये संगठन 
1- भारत को राष्ट्र नही मानता बल्कि सरदार पटेल ने दादागिरी ( AISA के अनुसार)  करके कश्मीर हैदराबाद नागालैंड और पूर्वोत्तर के क्षेत्रों को देश में शामिल किया ।
2- JNU में महिसासुर शहीद दिवस मानना व माँ दुर्गा के प्रति  आपत्ति जनक प्रचार ।
3- राम को काल्पनिक बताना लेकिन दशहरा के समय सोशल मीडिया में रावण का महिमा मंडन करना ।
4 - भारतीय सेना को बलात्कारी बताना ।
5- कश्मीर नागालैंड हैदराबाद  पंजाब को भारत का उपनिवेश प्रचारित करना ।
6 - कम्युनिस्ट आतंकवादियों( नक्सलियों)   के हमलें में मारे गए सुरक्षा बलों के जवानों की मौत पर ख़ुशी मनाना ( बस्तर में 
शहीद CRPF के 75 जवानों की मौत पर JNU में इसी संगठन ने पार्टी का आयोजन किया था ) 
7 -  भारत की संसद में हमले का सूत्रधार अफजल
     को श्रद्धांजलि देना व नारे लगाना 
 "अफजल हम शर्मिंदा है 
  तेरे कातिल जिंदा है "  
अब AISA से जुड़े रहे महत्वपूर्ण नेताओं का परिचय - 
1- संदीप सिंह - 2007 में JNU में छात्र संघ के अध्य्क्ष रहे आज कल मिसेज रॉबर्ट वाड्रा के PA है ।जरा विचार कीजिये कांग्रेस नेता मिसेज रॉबर्ट वाड्रा ने युथ कांग्रेस या NSUI के नेता को अपना PA क्यो नही बनाया ? किसने संदीप सिंह की सिफारिश की ? 
2- शकील अहमद खान- आजकल कांग्रेस के सचिव है साथ ही बिहार के कटिहार से विधायक ।
3 - शहनवाज आलम - उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक कांग्रेस के अध्यक्ष।
4- मोहित कुमार - उत्तर प्रदेश में कांग्रेस IT सेल के प्रभारी ।
5 अनूप पटेल -उत्तर प्रदेश में ओबीसी कांग्रेस के अध्यक्ष ।
6- सैयद हुसैन - कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ।
7 जिग्नेश मेवानी- कांग्रेस के समर्थन से गुजरात मे निर्दलीय विधायक ।
8- कन्हैया कुमार - हाल में ही लाल शर्ट(लाल सलाम)पहनकर कांग्रेस में प्रवेश लिया ।
अब आप समझ गए कि क्यो 2016 में JNU के कन्हैया व खालिद की ग्रिफ्तारी पर राहुल गांधी पूरी कांग्रेस के साथ  धरने पर बैठे थे ।
ज़रा ध्यान  दीजिएगा की पिछले 9 - 10 महीनों में   कांग्रेस की राजनीति व रणनीति में बदलाव आया है जो कम्युनिस्ट राजनीति से मेल रखता है ।
1- देश मे लाखो लोगो को रोजगार  व सरकार को रेवेन्यू देने वाले उद्योगपतियों व व्यापारियों को सुबह शाम गाली देना उन्हें देश लूटने वाला  बताना ।
2 - कृषि कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा समिति बनाने और मोदी सरकार द्वारा 18 महीने तक कानून को निलंबित करने के बावजूद बार बार हिंसक किसान ? आंदोलन करना. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद दिल्ली को घेरना व लोगो को परेशान करना ।
किस कारण से ? इसके लिए थोड़ा फ्लैश बैक में जाना होगा ।

2008 बीजिंग ओलंपिक के उद्घाटन से एक दिन पहले 7 अगस्त 2008 को चीन की सरकार व कांग्रेस ( भारत नही) के बीच एक संधि हुई ।इस संधि पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी व चीन की तरफ से वांग जियारुई ने हस्ताक्षर किए ।
इस संधि के समय चीन की खास व महत्वपूर्ण अतिथि सोनिया गांधी व वर्तमान राष्ट्रपति ( उस समय उपराष्ट्रपति रहे)  शी जिनपिंग गवाह थे ।
विश्व राजनीति के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी देश की सरकार ने नही बल्कि पार्टी (या परिवार) ने किसी दूसरे देश की सरकार से समझौता किया ।
इस समझौते(कांग्रेस व चीन के बीच )का उद्देश्य राजनैतिक ,क्षेत्रीय  मसलों पर विचारों व सूचना का आदान प्रदान करना ।
सरकार देश मे किसी की भी  हो (जैसे मोदी सरकार)कांग्रेस उच्चस्तर पर चीन से बातें कर सकती है। 
इस संधि के बाद भारत मे कुछ सिलसिले वार घटना (संयोग या साजिश) का विश्लेषण ।
1 - अगस्त में हुई इस संधि के तीन महीने बाद 26 /11 का मुंबई हमला और हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी का प्रचार । हवलदार तुकाराम (👍)ने अगर कसाब को जिंदा न पकड़ा होता तो हिन्दू आतंकवाद की  थ्योरी देश मे स्थापित कर दी जाती ।
2 - 2008 के पश्चात भारत का बाजार चीन के सामानों से पट गया देश का मैनुफैक्चरिंग उद्योग बर्बाद हो गए व ट्रेडिंग बिज़नेस शुरू हुआ ( चीन से माल लाना और उस पर अपना नाम लगा के बेचना )
3 - प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के अरूणाचल प्रदेश की यात्रा का  चीन द्वारा विरोध  और अरुणाचल को अपना बताना ।  अज्ञात कारणों से  मनमोहन जी यात्रा कैंसल कर दी यानी देश का प्रधानमंत्री अपने है देश के एक हिस्से में नही जा पाए क्यों???
4- 2017 में डोकलांम विवाद के समय भारत व चीन के बीच तनाव था तो कांग्रेस के राहुल गांधी भारत मे  चीनी राजदूत लुओ के साथ रात में बैठक करना और उसे छुपाने की कोशिश करना ।
5- 2019 में राहुल गांधी द्वारा मानसरोवर यात्रा के समय कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना के नेताओं से मिलना ।
6 - गलवान घाटी संघर्ष के समय जब लोक सभा मे कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने चीन को जिम्मेदार बताया तो दूसरे दिन ही कांग्रेस के प्रवक्ता आंनद शर्मा ने इसे अधीर रंजन का व्यक्तिगत विचार बताया और कांग्रेस इस विचार ( चीन जिम्मेदार)  से सहमत नही है । अज्ञात कारणों से कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को चीन को जिम्मेदार बताने वाले ट्वीट डिलीट करने पड़े ।
7- क्या इसी संधि के कारण कम्युनिस्ट संगठन AISA के नेताओं को कांग्रेस के  टॉप मोस्ट पोस्ट दिए जा रहे वही कांग्रेस के लिए अपना धन समय व जीवन लगाने वाले सच्चे कांग्रेसी कही नही है ।अब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को आत्म चिंतन करने (गुलामो की आत्म व मन दोनों सुप्त होते है ) कि आवश्यकता है 
की देश , पार्टी , परिवार में महत्वपूर्ण कौन है ?  
"जब जीवन स्थायी नही है तो पद ,पावर, कुर्सी लालबत्ती ,कैसे स्थायी हो सकती है लेकिन राष्ट्र हमारे जन्म से पहले भी था और हमारे मरने के बाद भी रहेगा " 
      जय हिंद  

"विचार शून्य मनुष्य पशु के समान है "  
           महाभारत 
विचार कीजियेगा  
     
      प्रो ब्रह्म राक्षस की 🖊️

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