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सेकुलरिज़्म का ही दूसरा नाम हरामीपन है

सेकुलरिज़्म का ही दूसरा नाम हरामीपन है।कोई शक़ अगर हो--- तो इन तथ्यों पर ध्यान दीजिये--- सेक्युलर कहते हैं कि-- करवा चौथ नारी उत्पीड़न है- तीन तलाक़ धार्मिक आस्था? सेक्युलर कहते हैं कि-- देवदासी प्रथा वेश्यावृत्ति थी- हलाला पवित्र नारी-शुद्धिकरण? सेक्युलर कहते हैं कि-- बहु विवाह एक अनैतिक प्रथा थी-  चार-निक़ाह ईश्वरीय आदेश? सेक्युलर कहते हैं कि-- चुटिया रखना धार्मिक ढोंग है- बिना मूँछ की बकर-दाढ़ी ईश्वर का नूर है? सेक्युलर कहते हैं कि-- यज्ञोपवीत पहनना धार्मिक कट्टरवाद है- लेकिन अरबी लबादा ओढ़ना धार्मिक पहचान है? सेक्युलर कहते हैं कि-- तिलक लगाना दकियानूसी कट्टरता है- लेकिन मत्थे पे ईंट से रगड़कर बनाया काला निशान आध्यात्मिक है? सेक्युलर कहते हैं कि-- कर्ण छेदन असभ्य क्रूरता है-  ख़तना अलौकिक प्रक्रिया? सेक्युलर कहते हैं कि-- पितृपक्ष तर्पण एक ढोंग है-  लेकिन मरहूमों की मज़ारों पर चढ़ावा चढ़ाना श्रद्धा? सेक्युलर कहते हैं कि-- तीर्थ-यात्रा पैसा कमाने का मनुवादी ढोंग-  लेकिन लाखों रुपये फूँककर हज़-उमरा पवित्र ईश्वर का दर्शन? सेक्युलर कहते हैं कि-- जल्लीकट्टू पशु उत्पीड़न ...

बोधकथा - संगठन

*एक आदमी था, जो हमेशा अपने संगठन में सक्रिय रहता था,  उसको सभी जानते थे ,बड़ा मान सम्मान मिलता था; अचानक किसी कारण वश वह निष्क्रीय रहने लगा , मिलना - जुलना बंद कर दिया और संगठन से दूर हो गया।*        *कुछ सप्ताह पश्चात् एक बहुत ही ठंडी रात में उस संगठन के मुखिया ने उससे मिलने का फैसला किया । मुखिया उस आदमी के घर गया और पाया कि आदमी घर पर अकेला ही था। एक बोरसी में जलती हुई लकड़ियों की लौ के सामने बैठा आराम से आग ताप रहा था। उस आदमी ने आगंतुक मुखिया का बड़ी खामोशी से स्वागत किया।*         *दोनों चुपचाप बैठे रहे। केवल आग की लपटों को ऊपर तक उठते हुए ही देखते रहे। कुछ देर के बाद मुखिया ने बिना कुछ बोले, उन अंगारों में से एक लकड़ी जिसमें लौ उठ रही थी (जल रही थी) उसे उठाकर किनारे पर रख दिया। और फिर से शांत बैठ गया।*       *मेजबान हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था। लंबे समय से अकेला होने के कारण मन ही मन आनंदित भी हो रहा था कि वह आज अपने संगठन के मुखिया के साथ है। लेकिन उसने देखा कि अलग की हुई लकड़ी की आग की लौ धीरे धीरे कम हो रही है। कुछ देर...

सुभाषित 1

मनो हि हेतुः सर्वेषामिन्द्रियाणां प्रवर्तने।। शुभाशुभास्ववस्थासु तच्च मे सुव्यवस्थितम्।