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विभाग शिक्षा आयाम

*इंग्लैंड में पहला स्कूल 1811 में खुला उस समय भारत में 7,32,000 गुरुकुल थे, आइए जानते हैं हमारे गुरुकुल कैसे बन्द हुए।* *हमारे सनातन संस्कृति परम्परा के गुरुकुल में क्या क्या पढाई होती थी, ये जान लेना पहले जरूरी है।* 01 अग्नि विद्या (Metallurgy)  02 वायु विद्या (Flight)  03 जल विद्या (Navigation)  04 अंतरिक्ष विद्या (Space Science)  05 पृथ्वी विद्या (Environment)  06 सूर्य विद्या (Solar Study)  07 चन्द्र व लोक विद्या (Lunar Study)  08 मेघ विद्या (Weather Forecast)  09 पदार्थ विद्युत विद्या (Battery)  10 सौर ऊर्जा विद्या (Solar Energy)  11 दिन रात्रि विद्या  12 सृष्टि विद्या (Space Research)  13 खगोल विद्या (Astronomy)  14 भूगोल विद्या (Geography)  15 काल विद्या (Time)  16 भूगर्भ विद्या (Geology Mining)  17 रत्न व धातु विद्या (Gems & Metals)  18 आकर्षण विद्या (Gravity)  19 प्रकाश विद्या (Solar Energy)  20 तार विद्या (Communication)  21 विमान विद्या (Plane)  22 जलयान विद्या (Water ...

अखंड भारत

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नेहरू जिन्नाह की महत्वकांक्षा बनी लाखों बलिदानियों का अपमान, गांधी के सपने भी हुए चकनाचूर विभाजन की विभीषिका और आजादी के अमृत महोत्सव पर इंद्रेश कुमार की कलम से (लेखक आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक हैं) "14 अगस्त" यानी भारत विभाजन की विभीषिका दिवस..  और "15 अगस्त" यानी विभाजित भारत का स्वतंत्रता दिवस। सन 1857 से लेकर 1947 तक के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, संकल्पों, जयघोषों और नारों के बीच की कथा भारत के 140 करोड़ लोगों और नौनिहालों तक को जानना जरूरी है। बात 1857 की... "मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।" यानी भारत नहीं दूंगी। "फिरंगी मारो देश बचाओ, आजादी लाओ।" जन धारणा तैयार होने लगी कि अंग्रेज़ यानी फिंरंगी... कुटिल हैं, चालबाज हैं, षडयंत्रकारी हैं, धोखेबाज और अत्याचारी हैं... कुछ इस प्रकार से जनक्रान्ति आगे बढ़ी। फिर इस जनक्रांति में नया इतिहास जुड़ा। और वह था "संन्यासी आंदोलन - वन्देमातरम।" इसी कड़ी में आया "फकीर मलंग आंदोलन।" "एक ही सपना - अखंड रहे हिंद अपना।" फिर शुरुवा...

जंगल सत्याग्रह

देश को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं. इस संदर्भ में स्वतंत्रता संग्राम का लेखा-जोखा स्वाभाविक है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी शताब्दी की दहलीज पर है. ऐसे में यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम में संघ का क्या योगदान है? इस दृष्टि से स्वतंत्रता संग्राम के सविनय अवज्ञा आंदोलन से संघ के संबंधों का अवलोकन अत्यंत प्रासंगिक होगा. यह आलेख मुख्यत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अभिलेखागार में उपलब्ध मूल प्रलेखों तथा तत्कालीन ‘केसरी’ और ‘महाराष्ट्र’ मराठी साप्ताहिक समाचार पत्रों में प्रकाशित सामग्री पर आधारित है. संघ का योगदान लगभग शून्य, परन्तु संघ स्वयंसेवकों का योगदान उल्लेखनीय सबसे पहले इस प्रश्न का उत्तर कि स्वतंत्रता संग्राम में संघ का क्या योगदान है? इसका यदि सीधा उत्तर देना हो तो कहा जा सकता है कि स्वतंत्रता संग्राम में संघ का योगदान लगभग शून्य है, पर संघ स्वयंसेवकों का योगदान उल्लेखनीय है. इस उत्तर से अनेक पाठकों को आश्चर्य होगा. इस उत्तर का मर्म जानने के लिए सबसे पहले संघ निर्माता डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और इसी संदर्भ में संघ की वैचारिक भूमिका थोड़ी विस्तार से समझ...

💐💐साफ नीयत💐💐

एक नगर में रहने वाले एक पंडित जी की ख्याति दूर-दूर तक थी। पास ही के गाँव में स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से,  उन्हें वहाँ का पुजारी नियुक्त किया गया था। एक बार वे अपने गंतव्य की और जाने के लिए बस में चढ़े,  उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और सीट पर जाकर बैठ गए। कंडक्टर ने जब किराया काटकर उन्हें रुपये वापस दिए तो पंडित जी ने पाया कि कंडक्टर ने दस रुपये ज्यादा दे दिए हैं।  पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कंडक्टर को रुपये वापस कर दूंगा। कुछ देर बाद मन में विचार आया कि बेवजह दस रुपये जैसी मामूली रकम को लेकर परेशान हो रहे है,  आखिर ये बस कंपनी वाले भी तो लाखों कमाते हैं, बेहतर है इन रूपयों को भगवान की भेंट समझकर अपने पास ही रख लिया जाए।  वह इनका सदुपयोग ही करेंगे। -मन में चल रहे विचारों के बीच उनका गंतव्य स्थल आ गया. बस से उतरते ही उनके कदम अचानक ठिठके, उन्होंने जेब मे हाथ डाला और दस का नोट निकाल कर कंडक्टर को देते हुए कहा,  भाई तुमने मुझे किराया काटने के बाद भी दस रुपये ज्यादा दे दिए थे। कंडक्टर मुस्कराते हुए बोला,  क्या आप ह...