संदेश

सितंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

महर्षि कणाद

एक वृद्ध ऋषि रुग्ण अवस्था में अपनी सैया पर पड़े हुए थे। उनके आसपास उनके शिष्यों का, रिश्तेदारों का और चाहने वालों की बड़ी भीड़ बैठी हुई थी। ऋषिवर की हालत देखकर सभी बहुत चिंतित थे। ऋषि के गले से मंद मंद घुर्र घुर्र की आवाज आ रही थी। उनके लिए सांस लेना भी बहुत ही कष्ट प्रद थी। बीच-बीच में लंबी सांस लेते थे, उनका अगले सांस ले पाएंगे या नहीं कहना कठिन था। उनकी हालत देखकर सबके मन में आ रही थी ।  पास में बैठे वैधराज ने एक दवा की खुराक बनाई और ऋषिवर को दी , कुछ ही देर बाद उन्होंने आंखें खोली सभी के चेहरे पर खुशी थी। एक शिष्य से पूछा ऋषिवर आप क्या लेना चाहते हैं । जल लेंगे क्या? ऋषिवर ने धीरे से गर्दन हिलाई और अत्यंत मंद स्वर में  कहा नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए । उनके बड़े भाई वहां उपस्थित थे।  वह बोले अरे कांतिमान अब तुम परमेश्वर को चिंतन करो और उस बूढ़े शरीर के मुख से आवाज आई पीलू पीलू पीलू  वैधराज ने कहा - आपके इष्ट देवता का नाम स्मरण करो कुलदवता का नाम लो । ऋषिवर फिर से बोले पीलो पीलो पीलो  उनके एक शिष्य ने  मधुर भजन गाया।  ऋषिवर ने शांति चित्र से सुना भजन स...

महर्षि रमण

महर्षि रमण का जन्म सन 1869 में तमिलनाडु के एक छोटे से गांव तिरूचूली में हुआ। तिरूचूली मदुरै से 30 मील दूर है। 12 वर्ष की आयु में पिताजी का निधन हो गया। एक दिन इनके घर में एक अतिथि आए वह अरुणाचल से आए थे। अरुणाचल शब्द सुनकर बालक रमन को जादुई असर डाल दिया था। और उसके बारे में जिज्ञासा पैदा होने लगी। बाद में वे अरुणाचल देखने के लिए निकल पड़े, वेंकटरमन गाड़ी में सवार होकर एक डिब्बे में बैठकर अरुणाचल के लिए निकल पड़े खाने का रोकने का कोई व्यवस्था नहीं है फिर भी मंजिल अरुणाचल पहुंचना था। वेंकटरमन के पास यात्रा के लिए भी पैसे नहीं थे तो उसने अपने सोने की बालियों को उतार कर उन्होंने एक व्यापारी को बेचे। वह ₹4 दिए उस व्यापारी भाग अवतार नामक व्यक्ति ने सोने की बाली ₹20 आंकी बाद में और पैसे देने की बातचीत हुई और उसने अपना पता वेंकटरमन को दिया पर वह पता को उन्होंने फाड़ कर फेंक दिया। क्योंकि बाकी शेष पैसा उन्हें नहीं चाहिए थे । जब अरुणाचल में अरुणाचलेश्वर मंदिर पहुंचे तो खुशी का ठिकाना ना रहा वह वहां ध्यान करने लग गए, परंतु कुछ शरारती बच्चे उन्हें परेशान करने लग गए थे। मां को जब पता चला तो वे अपने...

महात्मा गांधी जी

१.एक बार निरीक्षक महात्मा गांधी के विद्यालय में आए शिक्षक ने बच्चों को कुछ अंग्रेजी शब्द लिखने के लिए कहा गांधी जी ने केटल शब्द का स्पेलिंग गलत लिखा था शिक्षक के ध्यान में आया तो उन्होंने गांधीजी के पास बैठे विद्यार्थी की नकल करने के लिए कहा परंतु गांधी जी ने ऐसा नहीं किया उनके मन में विचार आया कि शिक्षक ने कहा था कि नकल करना बुरी बात है । २.गांधी जी बचपन में दो नाटक देखें जिसका उन पर बड़ा प्रभाव रहा श्रवण की पुत्र भक्ति और राजा हरिश्चंद्र। ३. गांधीजी छिपकर मांसाहारी और धूम्रपान करने लग गए थे। एक बार अपने भाई की कर्जा चुकाने के लोन में सोने की चोरी की। ४.अपनी जिंदगी से निराश होकर वे धतूरे के जहरीले बीज खाकर मरने का विचार किया था इस बात को उन्होंने अपने पिताजी को पत्र में कांपते हुए लिखा था। ५. 13 वर्ष की आयु में कस्तूरबा के साथ विवाह हो गया। श्यामलाल भट्ट की गुजराती कविता उन दिनो वे सुना करते थे। ६. भावनगर के सामल दास कॉलेज में अपनी पढ़ाई जारी रखी। ७. एक स्वामी जी महात्मा गांधी जी के घर में आकर के कहा कि लड़का पढ़ाई के लिए इंग्लैंड क्यों नहीं जाता और यह उनके मन को भा गया। ८. जब इंग्लैं...