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जगन्नाथ प्रभु जी

 जगन्नाथ भगवान 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️  ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा से भगवान श्री जगन्नाथ आज भी रोगी हो जाते हैं। इस वर्ष 21 जून शुक्रवार से अगले 15 दिनों तक जगन्नाथ भगवान बीमार रहते हैं। 15 दिन के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं और उनकी रसोई बंद कर दी जाती है। भगवान् जगन्नाथ के बीमाऱ होने से जुडी एक प्राचीन कथा इस प्रकार हैं। उड़ीसा प्रान्त में जगन्नाथ पूरी में एक भक्त रहते थे , श्री माधव दास जी  अकेले रहते थे, कोई संसार से इनका लेना देना नही। अकेले बैठे बैठे भजन किया करते थे, नित्य प्रति श्री जगन्नाथ प्रभु का दर्शन करते थे और उन्ही को अपना सखा मानते थे, प्रभु के साथ खेलते थे। प्रभु इनके साथ अनेक लीलाए किया करते थे | प्रभु इनको चोरी करना भी सिखाते थे भक्त माधव दास जी अपनी मस्ती में मग्न रहते थे | एक बार माधव दास जी को अतिसार( उलटी – दस्त ) का रोग हो गया। वह इतने दुर्बल हो गए कि उठ-बैठ नहीं सकते थे, पर जब तक इनसे बना ये अपना कार्य स्वयं करते थे और सेवा किसी से लेते भी नही थे। कोई कहे महाराजजी हम कर दे आपकी सेवा तो कहते नही मेरे तो एक जगन्नाथ ही है वही मेरी रक्षा...

जागरण पत्रिका

*👉जागरण पत्रिका आयाम कार्य*  **जागरण पत्रिका** 1. संपादन l 2. मुद्रण l 3. वितरण l 4. अर्थसंग्रह l 5.  विस्तार l =========== 1.  जागरण पत्रिका क्यों ? 2.  पत्रिका कहां भेजना ग्रामीण(शाखा विहीन गांव) व शहरी (सेवा बस्ती) l 3. जागरण पत्रिका के पहुंचने की व्यवस्था को बनाना l  4. पता संग्रहण एवं सत्यापन l 5.  प्रतिपुष्टि - ( feed back) (क)  पत्रिका समय पर एवं सभी अंक पहुंच रहे हैं । (ख)  विषय वस्तु पाठकों के स्तर के अनुकूल, समयानुकूल, युगानुकूल । 6.  जागरण पत्रिका प्रमुख बनाना l 7.  पाठक सम्मेलन वार्षिक ( खंड स्तर पर ) 8. संवाद एवं विषय वस्तु आदान-प्रदान के लिए व्हाट्स एप दूरभाष अंक l उसकी बिषयवस्तु का निर्धारण, निर्देशन कैसे होता है? (जागरण पत्रिका +) • बिषयों में भारतीय दृष्टि क्या हो इसका विचार करते है, बिषय निश्चित होने पर टोली का निर्धारण करते है। • बिषय और दृष्टि दोनों पत्रिका संपादक ही तय करते हैंऔर लेखक को देते हैं। • Relevant concern क्या रहता है? आर्थिक और पाठक सम्बन्धित  पहलुवों को ध्यान देते हैं। • बहुमार्गी लेखन और पाठक दृष्...

राजा शिबी

राजा शिबी के दान वीरता की कथा  शिबी की परीक्षा लेने के लिए इंद्र ने बाज पक्षी का तथा अग्नि ने कबूतर का रूप धारण किया और दोनों ने राजा के यज्ञ मंडप में प्रवेश किया और अपने प्राणों की रक्षा की इच्छा से बाज के भय से कबूतर राजा की गोदी में जा बैठा | बाज ने कहा – राजन ! समस्त भूपाल केवल आपको ही धर्मात्मा बताते हैं फिर आप धर्म विरुद्ध कार्य कैसे कर सकते हैं | यह कबूतर मेरा आहार हैं मैं भूख से व्याकुल हूँ  आप धर्म के लोभ में इसकी रक्षा न करे | वास्तव में आपने इसकी रक्षा कर धर्म विरुद्ध कार्य ही किया हैं | राजा बोले- पक्षिराज ! यह कबूतर अपनी प्राण रक्षा के उद्देश्य से मेरी शरण में आया हैं इसकी रक्षा करना मेरा परम् धर्म हैं | यह तुमसे अत्यधिक भयभीत हैं |  ऐसी दशा में इसका त्याग करना निंदनीय होगा | जो मनुष्य ब्राह्मणों की हत्या करता हैं , जो गौमाता का वध करता हैं जो शरण में आये हुए की रक्षा नहीं कर्ता हैं ये तीनों ही पाप कर्म हैं | बाज ने कहा – हे राजन ! सब प्राणी आहार से ही उत्त्पन होते हैं आहार से ही उनकी वृद्धि होती हैं और आहार से ही जीवित रहते हैं |जिसका त्याग करना अत्यंत कठिन ...