जागरण पत्रिका
*👉जागरण पत्रिका आयाम कार्य*
**जागरण पत्रिका**
1. संपादन l
2. मुद्रण l
3. वितरण l
4. अर्थसंग्रह l
5. विस्तार l
===========
1. जागरण पत्रिका क्यों ?
2. पत्रिका कहां भेजना ग्रामीण(शाखा विहीन गांव) व शहरी (सेवा बस्ती) l
3. जागरण पत्रिका के पहुंचने की व्यवस्था को बनाना l
4. पता संग्रहण एवं सत्यापन l
5. प्रतिपुष्टि - ( feed back)
(क) पत्रिका समय पर एवं सभी अंक पहुंच रहे हैं ।
(ख) विषय वस्तु पाठकों के स्तर के अनुकूल, समयानुकूल, युगानुकूल ।
6. जागरण पत्रिका प्रमुख बनाना l
7. पाठक सम्मेलन वार्षिक ( खंड स्तर पर )
8. संवाद एवं विषय वस्तु आदान-प्रदान के लिए व्हाट्स एप दूरभाष अंक l
उसकी बिषयवस्तु का निर्धारण, निर्देशन कैसे होता है? (जागरण पत्रिका +)
• बिषयों में भारतीय दृष्टि क्या हो इसका विचार करते है, बिषय निश्चित होने पर टोली का निर्धारण करते है।
• बिषय और दृष्टि दोनों पत्रिका संपादक ही तय करते हैंऔर लेखक को देते हैं।
• Relevant concern क्या रहता है? आर्थिक और पाठक सम्बन्धित पहलुवों को ध्यान देते हैं।
• बहुमार्गी लेखन और पाठक दृष्टि का ध्यान कैसे चलाते हैं issue, Agenda, Narrative building में क्या दिशा रहती है? विशेषज्ञ जानकारों से सामग्री की चर्चा करते हैं क्या?
• Contant - Data - Veapen : पत्रिका संग्रह, पत्रिका डिजिटल, अरकार्ईव चाहिये। News, news- cense
• वैचारिक, राजनैतिक, समसामयिक, युवा बिषयों का % कितना -२ रहता है? युवा विवेक पोर्टल चलता है।
• Contant & subcontant सभी आयु वर्ग के लिये हो, और सब का एक ही सन्देश रहे, इसका ध्यान रहे।
• वैचारिक प्रवाह के साथ -२ सम्पूर्ण समाज की पत्र पत्रिका बने। पुन: पत्रिका पर विश्वास बढ़ा है।
• Mazine का काम जो नहीं दिख रहा है उसकों दिखाना, बताना, अनुसंधान इसकी जान रहती है।
जागरण पत्रिका कार्यवृत
• पत्रिका का नाम 2. प्रान्त। 3. On line -Off line 4. कुल गाँव 5. पत्रिका ग्राम 6. प्रति छपाई संख्या 7. वितरण संख्या डाक द्वारा 8. वितरण संख्या कार्यकर्ता द्वारा 9. PDF संख्या 10. Viewers
शताब्दी वर्ष पर लक्ष्य एवं योजना
• प्रत्येक गाँव तक जागरण पत्रिका पहुँचे, ऐसी योजना पर काम हो।पत्रिका विस्तार संघ का कार्य है, विस्तार को बनाये रखना प्रचार विभाग का कार्य है।
• संघ वृत्त में जागरण पत्रिका का वृत होना चाहिये, वृत्त लेते हैं क्या?
• पत्रिका सामग्री जो संघ में नहीं, संघ सम्पर्क में भी कम हैं उनके लिये रहनी चाहिये।
• सरल शब्दों में, स्थानीय भाषा-बोली, लोकोक्ति, गीत मुहावरें चाहिये।राष्ट्रीय पत्रिकाओं से हमारी प्रतियोगिता नहीं है।ग्रामीण जनजीवन, व्यावहार, दिनचर्या का स्मरण रहे, लेखक ग्रामीण पृष्ठभूमि के हों।
• वैचारिक बिषयों के कारण समाज में परिवर्तन होता है, इन बिषयों पर निरंतर कार्य होना है।
• नियमित वैचारिक बिषय :पर्यावरण, जलसंरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कुटूम्ब प्रबोधन, सामाजिक सद्भाव, ग्राम विकास, समरसता, स्वदेशी, प्लास्टिक छोड़ना, परम्परागत एवं नूतन स्वावलम्बन प्रयोग-रोज़गार,लव जिहाद, झूठन जागृति इत्यादि।
• दो पेज के आर्टिकल नहीं आने चाहिये, आकर्षक छोटे-२ समाचार बढाने चाहिये जो मन मस्तिष्क पर रहने चाहिये। एक बिषय पूरे क्षेत्र में समान जाना चाहिये स्थाई विचार आधारित पत्रिका है।
• पत्रिका अपरिचितों को समझ आनी चाहिये, महिलायें प्रबन्धन में बढ़ें, कर्मचारी आधारित कार्य हो स्वावलम्बी पत्रिका हेतु प्रयास एवं योग्य प्रयोगयुक्त प्रबन्धन चाहिये।
• सम्पादकीय एवं प्रुफ रिडिंग टोली; मालिक, सम्पादक टोली में से कोई बदलता है तो पुन: सब एक बार में अधिकतम और सभी अपहर्ता पूर्ण करना।स्थाई व्यक्ति, वेतन, छपाई गुणवत्ता टोली, RNI no.से सम्बन्धित व्यक्ति हो।
• ट्रस्ट एवं सोसायटी की नियमित बैठक - 12A, 80G, trust deed; त्रिमासिक बैठक, रजिस्टर में कार्यवाही लिखी जाये।
• पाठक सम्मेलन में प्रान्त से चर्चा के बिषय बिन्दु देने चाहिये।जो विमर्श के अनुकूल हों।
• विविध संगठनों के पत्र-पत्रिका सम्पादकों की बैठक वर्ष में दो बार होनी है।वर्ष भर सम्पर्क, संवाद एवं कुछ बिषयों पर मिलकर कार्य हो।
*👉जागरण पत्रिका –*
१. उद्देश्य : जागरण पत्रिका के प्रकाशन और उसके प्रसार का उद्देश्य देश हित, समाज हित एवं राष्ट्रीय हितों से जुड़ी जानकारी समाज तक पहुंचाना । हिंदू विचार का विस्तार करना ।
२. लक्ष्य : प्रत्येक गांव तक जागरण पत्रिका का विस्तार, किन गाँवों/स्थानों को पहले चुनना/ संघ कार्य जहां नहीं है/ विचार का विस्तार जहां करना है।
3. पते अपडेट करना : डाक व्यवस्था को समझना / पते अद्यतन करना / पत्रिका पहुँचने की प्रतिपुष्टि की व्यवस्था बनाना
पत्रिका –
उद्देश्य एवं महत्व :
• राष्ट्रीय विचारों के प्रसार हेतु प्रबुद्ध वर्ग में पत्रिका की उपलब्धता।
• तरुण व्यावसायिक वर्ग में वार्षिक सदस्यता अभियान लेना, सदस्य संख्या बढाने की योजना में प्रबुद्ध वर्ग व्यक्ति/ समूह/ क्षेत्र चयन / सूची (व्हाट्सएप, मेल)
• वितरण की व्यवस्था योजना करना।
• पाठकों के अध्ययन समूहों का निर्माण।
• सदस्य एवं पाठकों का वार्षिक मिलन हो, जिसमें पत्रिका टोली से जुडें या प्रचार विभाग से जुडे कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में कार्यक्रम करना।
*💥👉:-संपादकीय कार्यात्मक प्रभागों में आम तौर पर शामिल हैं:*
1. *सामग्री निर्माण*:
- शोध
- लेखन
- संपादन
- प्रूफ़रीडिंग
2. *सामग्री समीक्षा*:
- तथ्य-जांच
- कानूनी समीक्षा
- गुणवत्ता नियंत्रण
3. *सामग्री उत्पादन*:
- डिज़ाइन
- लेआउट
- विज़ुअल
- मल्टीमीडिया
4. *सामग्री वितरण*:
- प्रकाशन
- मुद्रण
- डिजिटल वितरण
- सोशल मीडिया प्रबंधन
5. *सामग्री प्रबंधन*:
- योजना
- समन्वय
- शेड्यूलिंग
- बजट
ये प्रभाग विशिष्ट संपादकीय विभाग, प्रकाशन या संगठन के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। कुछ में अतिरिक्त प्रभाग हो सकते हैं या कुछ कार्यों को संयोजित किया जा सकता है।
संपादकीय कार्यात्मक प्रभाग को इंगित करने के लिए, आप यह कर सकते हैं:
1. *संगठनात्मक चार्ट*: संपादकीय टीम के भीतर पदानुक्रम और विभाग दिखाएँ।
2. *प्रक्रिया फ़्लोचार्ट*: सामग्री निर्माण, समीक्षा, उत्पादन, वितरण और प्रबंधन में शामिल चरणों और प्रभागों को चित्रित करें।
3. *नौकरी का विवरण*: संपादकीय टीम के भीतर प्रत्येक भूमिका के लिए विशिष्ट जिम्मेदारियों और कार्यों की रूपरेखा तैयार करें।
4. *विभागीय विखंडन*: संपादकीय टीम के भीतर विभिन्न विभागों और उनके कार्यों की विस्तृत सूची प्रदान करें।
इन दृश्य सहायता और स्पष्टीकरण का उपयोग करके, आप संपादकीय कार्यात्मक प्रभागों को प्रभावी ढंग से इंगित कर सकते हैं और दूसरों को टीम की संरचना और वर्कफ़्लो को समझने में मदद कर सकते हैं।
Editorial functional divisions typically include:
1. *Content Creation*:
- Research
- Writing
- Editing
- Proofreading
2. *Content Review*:
- Fact-checking
- Legal review
- Quality control
3. *Content Production*:
- Design
- Layout
- Visuals
- Multimedia
4. *Content Distribution*:
- Publishing
- Printing
- Digital distribution
- Social media management
5. *Content Management*:
- Planning
- Coordination
- Scheduling
- Budgeting
These divisions may vary depending on the specific editorial department, publication, or organization. Some may have additional divisions or combine certain functions.
To point out the editorial functional division, you can:
1. *Organizational charts*: Show the hierarchy and departments within the editorial team.
2. *Process flowcharts*: Illustrate the steps and divisions involved in content creation, review, production, distribution, and management.
3. *Job descriptions*: Outline the specific responsibilities and tasks for each role within the editorial team.
4. *Departmental breakdowns*: Provide a detailed list of the different departments and their functions within the editorial team.
By using these visual aids and explanations, you can effectively point out the editorial functional divisions and help others understand the structure and workflow of the team.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें