शहीद गुंडाधुर

गुंडाधुर नेता नार गांव के रहने वाले थे उनका मूल नाम सोमारू था बचपना गांव में ही जंगलों पहाड़ों और नदियों के बीच में पला बढ़ा बचपन से ही निडर साहसी और परिश्रमी थे घने जंगलों में अकेले चले जाना जंगलों में शिकार करने चले जाना या उनके निडरता की पहचान थी वह तरुण अवस्था में बलिष्ठ शरीर फौलादी शरीर के थे धनुष बाण चलाने में महारत हासिल था उनका निशाना अचूक था इनकी धनुष विद्या की चर्चा पूरे क्षेत्र में होने लगी थी जिसके कारण आसपास के कई गांव में उनकी विशेष पहचान हो गई थी गांव गांव में उनके दोस्त बन रहे थे जो आगे चलकर उनके सहयोगी बने बंधुओं एक कहावत बस्तर के बारे में चलता है कि बस्तर की भूमि जादू टोना की भूमि है या सत्य भी है क्योंकि पहले गांव में रुकना खतरा माना जाता था लोग इस कारण भय भूत रहते थे सबसे बड़ा कारण रहा यहां बलि प्रथा की यहां पशु पक्षियों के साथ ही नरबलि की परख आ रही शहीद गुंडाधुर मंत्र तंत्र जादू टोना में महारत हासिल थी कहते हैं कि जब अंग्रेजों ने बंदूक चलाने चाहा तो उनके बंदूक से गोली नहीं पानी निकलता था गुंडाधुर एक पेड़ में दिखाई देते थे तो दूसरे ही क्षण दूसरे पेड़ में दिखाई देते थे ऐसा उनका चमत्कारिक विद्या दिखलाई देता था ऐसी कहानी बस्तर के अंदर में सुनाई जाती है बंधुओं अंग्रेजों का आगमन 18 वीं शताब्दी में ही हो गया था अंग्रेजों का फूट डालो और राज करो नीति सबको पता ही है तथा राज परिवार में कैसे कंट्रोल करना सत्ता का स्थानांतरण कैसे करना इसमें अंग्रेजों को महारत हासिल था ऐसे ही घटना बस्तर राजपरिवार के साथ भी हुआ अंग्रेजों ने जंगल और उससे मिलने वाला उत्पाद पर अपना एकाधिकार करना चाहते थे इसलिए जंगल काटना जंगल से उत्पाद लेना एक प्रकार से जनजाति लोगों को जंगल में प्रवेश निषेध कर दिया गया पूरे जंगल का दो तिहाई भाग आरक्षित किया गया जिसमें किसी को ही प्रवेश मना ही था और इस कार्य के लिए निजामसागर ठेका दे दिया गया था बंधुओं जनजाति समाज का पूरा जीवन 1:00 पर आश्रित होता है जंगलों से ही उसकी जीवन की सारी मूर्तियां होती है उसके बिना वह एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता जनजाति समाज में आक्रोश बढ़ता ही गया यह आक्रोश अंदर ही था अभी तक बाहर नहीं आ पाया था और भी कुछ ऐसी घटनाएं होने लगी जो समाज के अंदर आक्रोश बढ़ता गया कहते हैं इसके तुरंत बाद ही अकाल पड़ गया जिसके कारण लोगों को खाने की लाले पड़ गए और दूसरा कारण था बस्तर के सेठ व्यापारी जो यहां के जनजाति समाज को लूट रहे थे जनजाति लोगों के महंगी वस्तुओं को कम दाम में लेना लूट कर उस संपत्ति को अंग्रेजों को देना जाने कि कर वसूल ना इस प्रकार का कार्य निरंतर चल रहा था यह भी एक षड्यंत्र का भाग था और जो कर नहीं दे पाता था उसका जमीन हड़प लिया जाता था यह एक बड़ा बर्बरता उन जनजाति समाज के साथ होने लगा था तीसरा कारण था धर्मांतरण यह एक सुनियोजित षड्यंत्र रहा आज हम बस्तर के अंदर धर्मांतरण बहुतायत में देख रहे हैं यह एक समस्या हमारे समूह खड़ी है इसके शुरुआती दिनों में बताते हैं किए कि 8 नाम का क्रिश्चियन सदरी आया हुआ था उसका मूल रूप से काम धर्मांतरण को बढ़ावा देने के लिए काम करना रहा अंग्रेजों का पूरा समर्थन उसको प्राप्त है इन बस्तर में आने के बाद उसने देखा कि यहां के लोगों को किस प्रकार शिक्षित किया जाए स्कूल कैसे खोला जाए स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे दी जाए इन सारी चीजों का अध्ययन करके उन्होंने काम करना प्रारंभ किया बंधुओं हम सब जानते हैं मिशन दूरी यह सब सेवाएं का उपयोग धर्मांतरण के कार्य पर करती है और यह यह चलता रहा मिस्टर याद की योजना थी दूर फैले फैले समाज को गांव को रोड के किनारे लाकर बस आई जाए जिससे उनके बच्चों को कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ा सके उन्हें बाइबल की शिक्षा दी जा सके इस प्रकार की सोच के साथ उसने काम करना प्रारंभ किया जनजाति समाज के लोग स्वतंत्र रहना पसंद करते हैं जंगलों में मेहनत करना परिश्रम करना शिकार करना यह उनकी पसंदीदा कार्य है परंतु जब मिसनरी लोग अंग्रेजों के साथ मिलकर उनके बच्चों को पकड़कर पढ़ाने का कार्य करने लगे जबरदस्ती करने लगे तो समाज के अंदर एक आक्रोश बढ़ने लगा बंधुओं यहीं से बस्तर के अंदर धर्मांतरण का बीच प्रारंभ हुआ था और इस बीच को प्रारंभ करने वाला यह मिस्टर यार था इन तीनों कारणों से अंग्रेजों के प्रति आम जनमानस में बड़ी आक्रोश थी परंतु उसका विरोध अंदर ही अंदर हो रहा था सामूहिक रूप से इसका प्रयास नहीं हो पा रहा था इसके लिए आवश्यक था कि कोई इसका नेतृत्व करें तो उस समय के कुछ प्रमुख लोगों ने मिल बैठकर तय किया गुंडाधुर को इसका नेतृत्व दिया जाना चाहिए गुंडाधुर ने इसका नेतृत्व करना प्रारंभ किया गांव गांव जाकर लोगों को संगठित करने का कार्य प्रारंभ किया बंधुओं उस समय बस्तर की जो प्रमुख जनजातियां थी मोरिया मोरिया धुर्वा हलवा बत्रा ऐसे जनजातियों को संगठित कर लिए गुंडाधुर जहां भी जाते थे लोग उनको देखने सुनने के लिए बड़ी संख्या में उपस्थित होते थे गांव की सारी महिलाएं बच्चे पुरुष उनको देखने के लिए लालायित हो जाते थे इस तरह से गांव के प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ कर उन्होंने जनजाति समाज पर हो रहे अत्याचार का प्रतिशोध लिया जाए बंधुओं हमने 18 57 की क्रांति के बारे में सुना होगा रोटी और कमल यह उस क्रांति का प्रतीक चिन्ह आ रहा परंतु बस्तर की क्रांति का प्रतीक चिन्ह बना आमा की दाल और लाल मिर्ची जिसको धारा दारा मेरी के नाम से जाना जाता है और इसी धारा मेरी को  एक गांव से दूसरे गांव  संदेश के रूप में लेकर जाते थे  कहीं-कहीं  गुंडे दूर के  कटार को भी  लेकर जाया जाता था अपनी अद्भुत संगठन क्षमता से गुंडाधुर ने पूरे बस्तर रियासत की यात्रा की लोगों से मिलजुल कर संगठन तैयार किया बिना रुके बिना थके अथक परिश्रम किया और इसी मित्रों को विद्रोह को भूम काल का विद्रोह कहा गया

सब कुछ तय कार्यक्रमों से के अनुसार चल रहा था 25 जनवरी 1910 को विद्रोह करने का निर्णय लिया गया सबसे पहले 2 फरवरी 1910 को जगदलपुर के पास एक गांव है पुष्पाल उस गांव में बैठने वाला जो बाजार था वहां से प्रारंभ हुआ जो लोग समाज के शोषित वर्ग थे अन्याय करते थे ऐसे लोगों को पकड़ पकड़ कर बाजार में पीटा गया 5 फरवरी 1910 को शोषित वर्ग के धन को एकत्र करने वाले पूंजी पतियों को लूट कर अनाज आम जनता में बांटा गया इस प्रकार की घटना से अंग्रेजी भयभीत हो गए गुंडाधुर का नाम सुनते ही डर से भागने लगे कहते हैं कि गुंडाधुर का नाम सुनते ही अंग्रेज गुफाओं में जा घुसे थे वनवासी समाज को एकत्र देखकर अंग्रेजों को अंदर ही अंदर डर सताने लगा इस प्रकार जहां भी आंदोलन होता शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई जाती वह गुंडाधुर जी के नेतृत्व में ही प्रारंभ होता था वह शोषित वर्ग के मसीहा बन गए ट्राइबल हीरो के रूप में उनको पहचान मिली तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी दूसरे राज्यों से सहायता मांगने के लिए संदेशा भिजवा ना जाने लगा गुंडाधुर अनेक ऐसे आंदोलन चलाएं और सभी आंदोलनों को उन्होंने जीता जनजाति समाज के लोगों को यह विश्वास था हमारे ऊपर जब भी संकट आएगा उस संकट से उबारने के लिए गुंडाधुर अवश्य आएंगे सबसे पहला प्रतिशोध बारसूर में हुआ बत्तीसा मंदिर के सामने सारे क्रांतिकारी एकत्र हुए थे दूसरे पक्ष में थे समाज को सूचित करने वाले दोनों के बीच में झड़प हुई और युद्ध हो करके शांत हुआ इसमें क्रांतिकारियों का विजय हुआ क्रांतिकारी आगे बढ़े कोंडागाँव भोपालपटनम के जमींदारों से फिट लड़ी अबूझमाड़ क्षेत्र में असंतोष काफी बढ़ गया था गुंडाधुर जी वहां भी जाकर संघर्ष गई और वहां मोरिया राज की स्थापना की वहां से वापस आते समय आए तुम्हारा नामक क्रांतिकारी बड़े डोंगर के रास्ते से केशकाल की ओर आ रहे थे परंतु बड़े डोंगर में ही तैनात अंग्रेज अधिकारी जिसका नाम दूरी था वह घात लगाए बैठा था जैसे क्रांतिकारी पहाड़ी के पास आए अंग्रेजों ने गोली चलाई गोलियों की आवाज सुनकर लोग सतर्क हो गए क्रांतिकारियों ने ढोल बजाई ढोल की आवाज सुनकर आसपास के गांव के लोग सैकड़ों की संख्या में एकत्र हवाएं दूरी ने देखकर थर थर कांपने लगा और पीछे हट गया यह तय हो गया क्रांतिकारियों को दबाने के लिए बस्तर के अंदर तैनात सिपाहियों के भरोसे संभव नहीं है इसलिए अन्य सहायता भी लिया जाना आवश्यक है अंग्रेज अधिकारियों ने रायपुर से एक ड्यूक नामक अधिकारी को भेजा वह बस बस्तर की ओर चल पड़ा सिपाहियों को लेकर के केशकाल घाटी पहुंचा था बंधुओं केशकाल घाटी बस्तर का प्रवेश द्वार है प्राचीन समय में केशकाल घाटी को चलना है बहुत कठिन काम माना जाता था गुंडाधुर को भी पता था केशकाल घाटी जो चल गया वह बस्तर में प्रवेश आसानी से कर सकता है इसलिए बाहर से आने वाली शक्तियों को घाटी पर ही निपटना ठीक रहेगा इस दृष्टि से अनेक क्रांतिकारियों को केशकाल घाटी में नियुक्त किया जब युग सिपाहियों के साथ केशकाल घाटी में चढ़ने लगा क्रांतिकारियों ने उसका प्रतिकार किया अनेक सिपाही मारे गए ड्यूक डर के मारे वहां से भाग निकला जब अंग्रेजों को पता चला तब इस स्थिति को निपटने के लिए एक नई योजना रचना बनाई एक अंग्रेज अधिकारी जो पूर्व में बस्तर के अंदर तैनात था कैप्टन गेयर उसे पुनः बस्तर भेजने की योजना बनाई डियर बस्तर की भौगोलिक रचनाओं से अवगत था इसलिए उसने पूरी तैयारी के साथ रायपुर से बस्तर की ओर चल पड़ा केशकाल घाटी में क्रांतिकारियों के साथ कड़ा संघर्ष हुआ अंततः उसे विजय हुआ और गियर बस्तर में प्रवेश करने में सफल रहा वह सीधा जगदलपुर पहुंचा जगदलपुर में बढ़ रहे विद्रोह को दबाने के लिए उसने अपनी कमर कसी थी गियर बहुत ही धूर्त इंसान था उस पर कुछ भी विश्वास नहीं किया जा सकता था वह अपनी चालबाजी प्रारंभ किया अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने के लिए उड़ीसा के जयपुर विशाखापट्टनम हैदराबाद की सेनाओं को संगठित करना प्रारंभ किया सबसे पहला प्रतिरोध उसे जगदलपुर के इंद्रावती नदी के किनारे स्थित खड़क घाट में अथवा सारे क्रांतिकारी योजनाबद्ध रूप से जगदलपुर पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़ रहे थे कहते हैं गियर ने यह बात फैलाई कि हम बातचीत से इस समस्या का हल करना चाहते हैं इसलिए खड़ा घाट में बातचीत के लिए एकत्र आएं क्रांतिकारी खड़क घाट में एकत्रित है थे गियर कौन सा चाल चलने वाला है किसी को पता नहीं था कहते हैं गियर एक कार में बैठकर वहां पहुंचा उतरते ही क्रांतिकारियों को विश्वास दिलाने के लिए मिट्टी की कसमें खाई मिट्टी की कसम खाना या ने अपनी मातृभूमि की कसम खाना इससे बड़ा और कसम कोई हो नहीं सकता था जनजाति समाज इस धरती को ही अपनी माता मानता है धरती उसका सब कुछ है वह विश्वास करके बातचीत करने के लिए सब सामने आते हैं गैर ने अपनी दूर तथा को प्रस्तुत करते हुए जनजाति समाज के लोगों के ऊपर गोली चलाने का आदेश दे दिया हजारों लोग यहां मारे गए जय एक बड़ा नरसंहार था इस ना हर्ष नरसंहार से क्रांतिकारियों को वरना भी था धीरे-धीरे पुनः समाज को संगठन करने का काम गुंडा दर्जी ने किया उन्हें समाज का विश्वास तो पहले से ही प्राप्त था समाज पुनः संगठित हुआ पहले से अधिक शक्तिशाली होकर क्रांतिकारी खड़े हुए और एक योजना बनाया गया अब जगदलपुर को कब्जा कर लिया जाए आसपास के 65 गांव से क्रांतिकारी एकत्र होकर आए थे जब गियर को यह पता चला पीएनआर में क्रांतिकारी एकत्र हुए हैं तो है सिपाहियों को लेकर के वहां पहुंच गया उनके साथ अचानक हमला कर दिया परंतु आहट पहले से ही पता चल चुका था क्रांतिकारियों ने मोर्चा संभाला डट कर उनका मुकाबला किया अंग्रेज सिपाही मारे जाने लगे गियर को समझ में आ गया मेरा यहां से भागना ही ठीक रहेगा अन्यथा मारा जाऊंगा गियर वहां से भाग खड़ा हुआ यह क्रांतिकारियों की एक बड़ी जीत थी

गियर  को समझ में आ गया था इन से सीधा मुकाबला करना संभव नहीं है इसलिए चाल चलना पड़ेगा गियर ने चार चढ़ना प्रारंभ किया गुंडाधुर जी के सबसे विश्वासी सहयोगी सोनू मांझी को गियर ने खरीद लिया जीत की खुशी मनाने के लिए सारे क्रांतिकारी नेता नारणाराम एकत्र हुए थे सभी और खुशी का वातावरण था सोनू माझी भी उन्हीं के साथ खुशी मना रहा था वह भी प्रसन्नता ट्रेन कौन जानता था कि सोनू मांझी ही दगा करने वाला है सोनू मांझी ही वह शख्स था जिसमें सभी क्रांतिकारियों को नशीली पदार्थ पिलाई सबको अपने हाथों से परोसा सभी क्रांतिकारी शराब के नशे में बदमाश साथी यह दिन था 24 मार्च 1910 का सब कुछ गियर के योजना अनुसार ही हो रहा था गियर 24:00 री से सिपाहियों से सुसज्जित रूप से तैयार था बस सोनू माजी का इशारा ही इंतजार था उधर सोनू माझी सबको शराब पिलाकर के चुपके से वहां से भागकर गियर के पास आ पहुंचा सूचना पाकर गियर वहां पर सेना के साथ पहुंचा वहां उसने गोरिया चलाना चालू किया बेहोश पड़े क्रांतिकारियों पर आधी रात को ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गई गुंडाधुर को आहत पता चल गया था  उसने अपने साथियों को उठाने की कोशिश की जगाने की कोशिश की परंतु सभी शराब के नशे में धुत थे कोई भी खड़े होने की स्थिति में नहीं थे गुंडाधुर भारी मन से वहां से भाग निकले और जंगल में चले गए और हमेशा के लिए भूमिगत हो गए बंधुओं को अंग्रेजों के हाथों में नहीं आए उनका स्पष्ट पहुंच सोच था  यदि मैं पकड़ में आ जाऊंगा प्रयाग होम कालका विद्रोह  हमेशा के लिए शांत हो जाएगा हमारा क्रांति  यहीं पर खत्म हो जाएगा और गैर तो आया ही था क्रांति को पूरी तरह से कुचलने के लिए था

अंग्रेजों ने देवरी दूर और 7 लोगों को पकड़कर जगदलपुर लाया गया लोगों के अंदर भय व्याप्त हो इसके लिए इन क्रांतिकारियों को जगदलपुर के गोल चौक इस्थित इमली के पेड़ में फांसी दे दिया गया उसके बाद दिन भर या लास्ट लटका रहा इस प्रकार अंग्रेजों का यह कायराना हरकत चल रहा था परंतु इस भूम काल विद्रोह का जननायक अंग्रेजों के हाथ में नहीं आया गुंडाधुर अन्याय के लिए लड़े शोषित समाज के लिए लड़े अपने अधिकारों के लिए लड़े वह वास्तव में ट्राइबल हीरो थे वह बाहुबली थे गुंडाधुर जी के जन्म के बारे में या मृत्यु के बारे में न लोगों को पता इतिहास में जितना जगह देना चाहिए था वह भी इनको नहीं मिला उसी प्रकार बस्तर के असली हीरो को भी इतिहास में उपेक्षित किया








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