गोपबंधु दास
गोपबंधु दास की जीवनी 10 पंक्तियाँ
1) गोपबंधु दास को उत्कलमणि के नाम से जाना जाता है।
2) वह एक स्वतंत्रता सेनानी, एक समाज सुधारक और एक महान कवि थे। 3) गोपबंधु दास का जन्म 9 अक्टूबर 1876
को पुरी जिले के सुआंडो में हुआ था। 4) दैतारी दास और स्वर्णमयी दास उनके माता-पिता थे। 5) गोपबंधु दास ने कम उम्र में ही अपनी माँ को खो दिया और कॉलेज की अवधि में गोपबंधु दास के पिता को भी खो दिया। 6) उन्होंने अपनी शिक्षा अपने गाँव के स्कूल में शुरू की। 7) गोपबंधु दास की शादी 12 साल की उम्र में हुई थी। 8) उन्होंने कोलकाता में कानून की पढ़ाई की थी। 9) गोपबंधु दास गरीबों के प्रति बहुत दयालु थे। 10) उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को चावल और कपड़े बांटे।
गोपबंधु दास की जीवनी पर अधिक 5 पंक्तियाँ
11) गोपबंधु दास सत्यबाड़ी बाना विद्यालय के संस्थापक थे।
12) दैनिक समाचार पत्र 'समाज' की स्थापना गोपबंधु दास ने की थी।
13) स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार कैद किया गया था।
14) गोपबंधु दास ने ढेर सारी कविताएँ लिखीं।
15) गोपबंधु दास ओडिशा के एक योग्य पुत्र थे।
गोपबंधु दास पर निबंध (50 शब्द)
गोपबंधु दास का जन्म 9 अक्टूबर 1876 को पुरी जिले के सुआंडो में हुआ था। दैतारी दास और स्वर्णमयी दास गोपबंधु दास के माता-पिता थे। गोपबंधु दास ने कम उम्र में ही अपनी माँ को खो दिया और कॉलेज की अवधि में अपने पिता को भी खो दिया। उन्होंने अपनी शिक्षा अपने गांव के स्कूल से शुरू की। 12 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया। गोपबंधु दास उड़ीसा के योग्य पुत्र थे।
उत्कलमणि गोपबंधु दास निबंध (100 शब्द)
गोपबंधु दास को हम उत्कलमणि के नाम से जानते हैं। वह एक स्वतंत्रता सेनानी, एक समाज सुधारक और एक प्रतिभाशाली कवि थे। उनका जन्म 9 अक्टूबर 1876 को पुरी जिले के सुआंडो में हुआ था। दैतारी दास और स्वर्णमयी दास उनके माता-पिता थे। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया और कॉलेज के दौर में ही उन्होंने अपने पिता को भी खो दिया। उन्होंने अपनी शिक्षा अपने गांव के स्कूल से शुरू की। गोपबंधु दास की शादी 12 साल की उम्र में हुई थी। उन्होंने कोलकाता में कानून की पढ़ाई की थी। गोपबंधु दास गरीबों के प्रति बहुत दयालु हैं। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को चावल और कपड़े बांटे। वह सत्यबाड़ी बाना विद्यालय के संस्थापक थे। गोपबंधु दास को दैनिक समाचार पत्र 'समाज' मिला। इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई बार गोपबंधु दास को कैद किया। उन्होंने ढेर सारी कविताएँ लिखीं। वह ओडिशा के एक योग्य पुत्र थे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने उन्हें कई बार कैद किया
गोपबंधुदास
महान देशभक्त शिक्षाविद्, समाज सुधारक तथा राजनीतिज्ञ पण्डित गोपबंधुदास का जन्म उत्कल (ओड़ीसा) प्रान्त के पवित्र पुरी जिले के 'सुवान्दो' ग्राम में पिता दैत्यारि और माता स्वर्णमयी देवी के यहाँ बुधवार ६ अक्टूबर १८७७ को प्रातःकाल हुआ। इनके पूर्वज जयपुर (राजस्थान) से यहाँ आये थे। वह कौशिक गोत्रीय ब्राह्मण थे। जन्म देने के कुछ दिन बाद ही माता का निधन हो गया। ताई श्रीमती कमलादेवी ने उनका पालन-पोषण किया। इनके पिता रियासत में मुख्तार थे। इनके कुल देवता विनोद बिहारी (श्रीकृष्ण) थे। प्रारंभिक पढ़ाई ग्राम पाठशाला में ही हुई। पिता इनको पाश्चात्य शिक्षा का विद्वान बनाना चाहते थे। परिवार जहाँ कठिन कर्मकाण्डी था वहीं अंग्रेजी शिक्षा के माध्यम से जीवन की प्रगति में विश्वास करता था। बारह वर्ष की अवस्था में गदापुर की आप्ति नाम कन्या से गोपबंधु का विवाह सम्पन्न हो गया। प्राथमिक शिक्षा के बाद रूपदेईपुर के मिडिल स्कूल में प्रवेश लिया। यहाँ के बाद पुरी के हाईस्कूल में प्रवेश पा गये जहाँ पुरी के प्रसिद्ध समाज सुधारक मुख्तार श्री रामचन्द्रदास से सम्पर्क आया। जिन्होंने ब्राह्मणों के उत्थान के लिए "उत्कल ब्राह्मण समिति" बनायी थी। यहीं पर पं. वासुदेव रथ से मित्रता हुई। पुरी में भयंकर प्लेग व अंग्रेज सिविल सर्जन की उपेक्षा के कारण लाशें सड़कों पर सड़ने लगीं। तब गोपबंधुदास ने "पुरी सेवा समिति" का निर्माण कर सेवा कार्य किया। विवश हो सविल सर्जन ने सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगी। सन् १८६६ में हाईस्कूल पास कर कटक के रेवेन शा कॉलेज में प्रवेश लिया। इसी वर्ष पिताजी का निधन हो गया। कटक में इन्होंने "कर्तव्य बोधिनी समिति" बनायी जिसके माध्यम से कलकत्ता विश्वविद्यालय में उड़िया विद्यार्थियों को संगठित किया। कलकत्ता विश्व विद्यालय से सम्बद्ध विद्यालयों में अंग्रेजी के अतिरिक्त बंगाली भाषा ही पढ़ाई जाती थी, आन्दोलन के कारण उड़िया भाषा को भी स्थान मिल गया। इस आन्दोलन में ओड़ीसा विधानसभा के विपक्ष के नेता बृजसुन्दर दास से सम्पर्क आया। बृजसुन्दर दास व हरिहर के साथ गोपबंधुदास ने बाढ़ पीड़ित सहायता समिति' का निर्माण किया। सन् १६०१ में एफ.ए. की परीक्षा पास की। सन
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