संघगीत 1 कोटि नमन हे अभिनव योगी
कोटि नमन है अभिनव योगी
हिंदू राष्ट्र के सूर्य प्रखर
हे आध्यात्म विभूति गुरुजी
अभिवादन हे संत प्रवर ।।ध्रु।।
केशव ने जो ज्योति जलाई
उसके तुम रखवारे बने
तोड़ तमिश्रा की काराये
तुम ज्वजलया मसाल बने
अंधकूप में पड़े देश को
दिखलाई है नई डगर ।।1।।
अभिवादन है संत प्रवर ........
जड़ता भेद विभेद चक्र से
मुक्त किया भारत भू को
युवकों का आह्वान निरंतर
संघटना से मत चूको
ऋषि दधीचि की परंपरा को
देकर जीवन की अमर ।।2।।
अभिवादन है संत प्रवर ...........
शाश्वत मूल्यों का संरक्षण
और सत्य का प्रतिपादन
अखिल विश्व में हिंदू राष्ट्र का
किया अभय डंका वादन
केशव माधव युगल मूर्ति का
यशोगान है निसि वासर ।।३।।
अभिवादन हे संत प्रवर..........
शुभाशीष के आकांक्षी हैं
लाखों लाख स्वयंसेवक
शाखाओं का जाल बिछा दे
सागर से हिम शिखरों तक
राष्ट्र परम वैभव तक पहुंचे
जन्मशती का घोष मुखर ।।४।।
अभिवादन हे संत प्रवर..........
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