संघगीत 4 हम हैं सपूत भारत के
हम हैं सपूत भारत के
हम हैं बंदे ईश्वर के ।।ध्रु।।
देश हमारा विशाल है
कौन हमारी महान है
लक्ष्य हमारा ऊंचा है
मार्ग हमारा दुर्गम है
व्रत मत छोड़ो जीवन का
पग मत छोड़ो मंजिल का
आगे आगे बढ़ना है
कदम मिलाकर चलना है
तो आंधी आवे तूफान
होठों पर हो नित मुस्कान
वतन के खातिर जीना है
वतन के खातिर है मरना
हम हैं सपूत भारत के
हम हैं बंदे ईश्वर के
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