संघगीत 3 सेवा का व्रत धारा

सेवा का व्रत धारा 
अर्पित जीवन सारा 
अर्पित जीवन सारा 
सेवा का व्रत धारा ।।ध्रु।।

साधक निज व्यक्तित्व निखारे 
सुंदर सुगठित रूप सवारे 
संभव करें असंभव को भी 
दृढ़ संकल्प हमारा ।।१।।
                          अर्पित जीवन सारा ..........

अनथक श्रम दिन रात करेंगे
 सहज सरल निर्लिप्त रहेंगे 
राष्ट्र देव की परम साधना 
जीवन पथ स्वीकारा ।।२।।
                      अर्पित जीवन सारा ..........
बीहड़ में भी सुमन खिलाए 
नूतन शुभ रचना प्रगटाये
गौरव से ललकारे जग को
पलटेंगे युगधारा ।।३।।
                      अर्पित जीवन सारा ..........

नए-नए युवकों की टोली 
जला सके जो अपनी होली 
धेय मार्ग पर उन्हें बढ़ाएं 
देकर स्नेह सहारा ।।४।।
                      अर्पित जीवन सारा ..........

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