संघगीत 7 युगे युगे से हिंदुत्व सुधा की

युग-युग से हिंदुत्व सुधा की, बरस रही मंगलमय धार ।

भारत की हो जय-जयकार, भारत की हो जय-जयकार ॥धृ॥


भारत ने ही सारे जग को, ज्ञान और विज्ञान दिया ।

स्नेह भरी दृष्टि से अपनी, जन-जन का उपकार किया ।

जननी की पावन पूजा का, सुखमय रूप हुआ साकार ।

भारत की हो जय-जयकार, भारत की हो जय-जयकार ॥१॥


भारत अपने भव्य रूप को, धरती पर फिर प्रकटाये ।

नष्ट करे सारे दोषों को, समरसता नित सरसाये ।

पुण्य धरा के अमर पुत्र हम, पहिचाने अपनी शक्ति अपार ।

भारत की हो जय-जयकार, भारत की हो जय-जयकार ॥२॥


भारत भक्ति हृदय में भरकर, अनथक ताप दिन-रात करें ।

शाखा रुपी नित्य साधना, सुन्दर सुघटित रूप वरें ।

निर्भय होके बढे निरंतर, दृढ़ता से जीवन व्रत धार ।

भारत की हो जय-जयकार, भारत की हो जय-जयकार ॥३॥    

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