बस्तर की क्रांति दूत 7
बस्तर की क्रांति दूत :- सप्तम पुष्प
क्रांति नेत्री स्वर्ण कुँवर
अंग्रेजों के शासन काल काल में कई प्रकार के अत्याचार किए गए उसने सबसे बड़ा अत्याचार था आदिवासियों का उत्पीड़न व
बस्तर के दोहन, इसके विरुद्ध ही सारी लड़ाइयां लड़ी गई।
राजमाता स्वर्ण कुँवर बस्तर के पूर्व राजा भैरव देव की की दूसरी रानी थी ।वे बस्तर आंदोलन को मार्गदर्शन देने वाली प्रमुख नेत्री थी। लगभग सभी लड़ाईओं में उनका मार्गदर्शन होता था ।तथा क्रांतिकारियों को सभी प्रकार से सहायता व उचित सुझाव देते थे ।
बस्तर में पर्यावरण को सुरक्षित रखने में उनकी बड़ी भूमिका है ।कई स्थानों पर उन्होंने वृक्षारोपण करवाएं नींबू ,आंवला जैसे अनेकों पेड़ व वृक्ष लगवाए ।
अतः हम कह सकते हैं कि वे एक प्रयोग पर्यावरण प्रेमी थी।
क्रांतिकारियों में उत्साह और उमंग जगाने वाली राजमाता को कई संघर्षों के बाद अंग्रेजों ने बंदी बना लिया तथा उन्हें रायपुर के जेल में भेज दिया भेज दिया ।
जहां अक्टूबर 1910 में उनकी मृत्यु हो गई।
वे बस्तर के हितों के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे।
आमचो बस्तर
आमचो माटी
जय भारत
साभार :- बस्तर के क्रांति दूत पुस्तक से
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