बस्तर के क्रांति दूत 9
बस्तर के क्रांति दूत :- नवम पुष्प
आयतु माहरा
भूमकाल आन्दोलन के कई महत्वपूर्ण नायक लगभग भुला दिये गये हैं जिनमे से एक थे आयतु माहरा। भूमकाल के योजनाकारों ने उसे अंतागढ़ और निकटवर्ती क्षेत्रों में विद्रोह का नेतृत्व करने का दायित्व सौंपा था। सरकारी दस्तावेजों (फॉरेन सीक्रेट, अगस्त 1911) में यह विवरण मिलता है कि आयतु के नेतृत्व में छोटे डोंगर के पूर्व का भाग और उसके आगे दक्षिण में चिंतलनार से सुकमा तक की पट्टी में विद्रोहियों ने व्यापक संघर्ष किया था। आंदोलन के आरम्भ के साथ ही आयतु के पास उसका पहला लक्ष्य था अंतागढ़। विद्रोही हथियारों को लहराते हुए अंतागढ़ में घुसे। देखते ही देखते वहाँ का एक मात्र स्कूल भवन और थाना जला दिया गया। इसके पश्चात आयतू ने नारायणपुर जेल पर हमला कर दिया। सभी कैदी मुक्त करा लिये गये।
अंग्रेज सैन्य अधिकारी कैप्टन डूरी माड़ियाओं के इस विद्रोह को अबूझमाड़ में दबाने का प्रयास कर रहा था। 5 मार्च 1910 को छोटे डोंगर के पास डूरी घात लगा कर बैठा था। विद्रोहियों की टोह पाते ही अचानक, आठ से दस राउंड़ गोलियाँ चली; तीन विद्रोही ढ़ेर हो गये। डूरी ने अचानक नगाडों की आवाज़ सुनी। समुचित व्यूह रचना के बाद धनुर्धारियों ने हमला किया। नुकीले बाण, चार सिपाहियों के आर पार हो गये। कैप्टन डूरी को यह आंकलन करते समय नहीं लगा कि यदि पीछे नहीं हटा गया तो पचास सैनिकों की इस टुकड़ी में कोई जीवित नहीं बचेगा। अगली सुबह आयतु के नेतृत्व में विद्रोही ‘कुतुल’ की ओर बढ़ रहे थे। कैप्टन डूरी ने एक बार फिर दुस्साहस भरी कार्यवाही की। बीस मिनट तक गोलियों का जवाब तीरों से दिया जाता रहा। एक सौ चवालिस राउंड़ गोलियाँ चली। जंगल रक्त से नहा गया। दर्जनों विद्रोही शहीद हो गये। डूरी के सिपाही भी हताहत हुए। एक पूरी बटालियन की जगह उसके पास केवल अठारह सैनिक रह गये थे। यह दूसरा मौका था जब विद्रोही हावी हो गये और डूरी को पीठ दिखा कर भागना पड़ा। डूरी अपने सैनिकों के साथ नारायणपुर की ओर निकल गया। उसकी गति साँप छुछुंदर वाली हो गयी। वह अपने साथियों के साथ मारा मारा फिर रहा था। किसी गाँव या नगर नहीं जा सकता था; विद्रोही हर जगह काबिज थे। उनके हाँथ लगने का अर्थ अब मौत ही होता। गनीमत थी कि ‘दि ब्रेट’ तक उसका संदेश पहुँच गया। आयतु माहरा का दमन करने के लिये ‘पंजाब बटालियन’ को अबूझमाड़ भेजा गया। अब परम्परागत हथियार परास्त होने लगे। निर्मम दमनात्मक कार्यवायी किये जाने के तहत आदिवासी गाँवों को जला दिया गया, साथ ही बड़ी संख्या में विद्रोही गिरफ्तार किये गये जिनमे आयतु माहरा भी थे।
जय भारत
आमचो बस्तर
आमचो माटी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें