संघगीत 6 लिए प्रखर संकल्प हृदय में
लिये प्रखर संकल्प
लिये प्रखर संकल्प हृदय में
आगे बढते जायेंगे
हिन्दु तत्व का गौरव वैभव
जगती मे प्रकटायेंगे
जगती मे प्रकटायेंगे ॥धृ॥
शक्ति पीठ है शाखा अपनी
करे प्रभावी प्रस्थापन
स्वाभिमान भर कर हुंकारे
कर दोशों का उच्चाटन
धर्म ध्वजा है अरुण पताका
गाव गाव फ़ेहरायेंगे ॥१॥
निर्भय होकर सतत चलेंगे
संकट की परवाह नही
लोभ मोह मद डिगा न सकते
सत्ता सुख की चाह नही
ध्येय निष्ठ अनगिन हृदयों से
स्नेहाम्रित छलकायेंगे ॥२॥
विजय वाहिनी संघटना का
शंख नाद देता संदेश
हिंदु फिर से जाग रहा है
जाग रहा है निज परिवेश
समरस सुख मय जन जीवन हो
वह रचना विकसायेंगे ॥३॥
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