अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा
अफगानिस्तान मामले
1. सरकार के भीतर उनके ही पुरानी सहयोगियों ने उनका सहयोग नहीं किया वह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए तालिबान से मिल गए।
2. तालिबान अपने चेहरे को सौम्य और सहिष्णु बनाने का प्रयास कर रहे हैं पर उसका यकीन नहीं किया जा सकता।
3. अमेरिका की साख खराब हुई 20 वर्ष से ज्यादा समय तक लड़ाई लड़ने के बाद अमेरिका ने उसी तालिबान को सत्ता सौंप दी इसके विरूद्ध लड़ाई लड़ा।
4. स्त्रियों की चिंता मलाला यूसुफजई वही है जिसे तालिबान ने इसलिए गोली मारी थी क्योंकि वह पढ़ना चाहती थी और लड़कियों की पढ़ाई की समर्थक थी।
अ- यदि पत्थरों और कोणों से सजा देने और स्त्रियों को घर में कैद करने वाली व्यवस्था को लागू करेंगे तो नागरिकों को परेशानी होगी।
ब- यदि वे आधुनिकता बनने का प्रयास करेंगे तो उनसे प्रश्न पूछा जा सकता है कि तवे चुनाव लड़ कर सरकार बनाने को तैयार क्यों नहीं हुए।
स- अमेरिका ने तालिबान के साथ समझौता अपने हितों को देखते हुए किया है अमेरिका का मानना था कि इस युद्ध के भार को लंबे समय तक वाहन नहीं कर सकता था पर जिस तरीके से उन्होंने अपनी सेना अफगानिस्थान से हटाई वह भी अविश्वसनीय है।
5. भारत पर प्रभाव-
अ- खास तौर पर सुरक्षा पर यह देखा गया है कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सलाह पर चलते हैं लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन उनके साथ कदम मिलाकर चलते हैं यह समूह कश्मीर के अंदर भी सक्रिय है।
ब- 90 के दशक में पाकिस्तान ने तालिबानी आतंकवादियों का इस्तेमाल कश्मीर में किया था। दिसंबर 1999 मे इंडिया एयरलाइंस के विमान का अपहरण में तालिबान ने पाकिस्तान की मदद की थी।
स- भारतीय निवेश भारत पिछले 20 वर्षों में अफगानिस्तान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब $3000000000 का पूंजी निवेश किया सलमा बांध और देश का संसद भवन इस सहयोग की निशानी है। काबुल नदी पर सहतूत बांध अभी बन रहा है।
द- काबुल में भारतीय दूतावास के अलावा अफगानिस्तान के चार शहरों जलालाबाद मजार शरीफ हेराथ और कंधार में भारत के वाणिज्य दूतावास ने लेकिन अब चारों बंद है पाकिस्तान शुरू से प्रयास रहा कि इन कार्यालयों व विकास परियोजनाओं को अफगानिस्तान में बंद कराने का प्रयास करता रहा है।
इ- भारत को मध्य एशिया से कारोबार के लिए रास्ते की आवश्यकता है। पाकिस्तान हमें रास्ता नहीं देगा ,हमने ईरान के रास्ते अफगानिस्तान को जोड़ने की योजना बनाई थी। भारत ने ईरान में चाबहार जाहेदान रेलवे लाइन का विकल्प तैयार किया। सीमा सड़क संगठन ने अफगानिस्तान में जरंज से डेलाराम तक 215 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण किया है। जो निमरोज प्रांत की पहेली पक्की सड़क है। 2016 में भारत ईरान अफगानिस्तान में एक त्रिपक्षीय समझौता किया था। जिसमें ईरान के रास्ते अफगानिस्तान तक कारीडोर बनाने की बात थी।
तालिबान कौन है?
* अरबी शब्द तारीफ का अर्थ है तलब रखने वाला खोज करने वाला जिज्ञासु या विद्यार्थी इसका सामान्य अर्थ है इस्लामी मदरसे के छात्र।
* 90 के दशक में इसकी शुरुआत जब सोवियत संघ अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा था। उस दौर में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने वाले मुजाहिद्दीन के कई गुट थे। इसमें सबसे बड़े समूह पश्तून इलाके से थे। पश्तो भाषी क्षेत्रों के मदरसों से निकले संगठित समूह की पहचान बनी तालिबान।
ये सर्वप्रथम 1994 में खबरों में आए ।
* सोवियत संघ के खिलाफ अभियान में अमेरिका भी शामिल हो गया, इसलिए उसने दूसरे मुजाहिद्दीन समूहों के साथ तालिबान को भी संसाधन उपलब्ध कराएं ।
जैसे हथियार गोला बारूद बंदूके इत्यादि।
* 1996 में तालिबान काबुल पर काबिज हुए और 2001 तक सत्ता में रहे।
* अमेरिका हमले के मुख्य आरोपी ओसामा को शरण देने का आरोप तालिबान पर लगा अमेरिका ने तालिबान से लादेन को सौंपने की मांग की जिसे तालिबान ने नहीं माना।
* 2001 में अमेरिका के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय सैनिक गठबंधन ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया और तालिबान शासन खत्म हो गया।
* ओसामा तालिबान प्रमुख मुल्ला मोहम्मद उमर व साथी अफगानिस्तान से निकलने में कामयाब रहे दोनों पाकिस्तान के एबटाबाद के एक मकान में रह रहे थे अमेरिकी कमांडो ने 2 मई 2011 को हमला करके मार गिराया।
* 2015 में तालिबान ने स्वीकार किया की मुल्ला उमर की मौत को 2 साल से ज्यादा समय तक छुपाया रहा खराब स्वास्थ्य के कारण पाकिस्तान के एक अस्पताल में मौत हुई थी।
भारत के तथाकथित सेकुलर-
* बहुलता ,सहिष्णुता ,जेंडर और धार्मिक आजादी की तहरीरें देने वाली जमात अफगान संकट पर मुंह में दही जमा कर बैठी रही।
* तालिबान के पक्ष में बड़ा वर्ग खड़ा नजर आ रहा है वह भारत के लिए चिंता का सबब है।
* ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने तालिबान को शुभकामना संदेश भेजा है।
* सपा सांसद शफीक उर रहमान ने आजादी के संघर्ष के साथ तालिबानी आंदोलन की तुलना की वह सबसे ज्यादा खतरनाक है।
* मुस्लिम भाइयों जो दुनिया भर में इस्लामिक आतंकी भेंट चढ़ते जा रहे हैं वैसे ही अफगानिस्तान के मुसलमान भी तालिबान ओं के हाथों मरने के लिए मजबूर है वतन से भागने को मजबूर है।
* अफगानिस्तान के पड़ोसी मुस्लिम देशों ने इस देश के चारों और मजबूत बाड़े बंदी कर दी है देश से भागकर जान बचाने को भी विकल्प अब समाप्त हो गया है।
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