खारवेल

बहुत पुरानी बात है लगभग 23 वर्ष पूर्व की कलिंग और मगध दो शक्तिशाली राज्य थे एक शताब्दी तक लगातार युद्ध चलता रहा इनके बीच में कलिंग की पराजय हुई और वह मगध को सबक सिखाने के लिए अवसर की प्रतीक्षा करने लगा कलिंग के राजा को एक धक्का देने वाला समाचार यह मिला की यवन ग्रीक यूनानी राजा विदेश से आकर सेना सहित मगध की ओर बढ़ रहा है मगध के लोगों ने 9 वर्ष पूर्व कलिंग को पराजित अपमानित किया था यदि कलिंग के राजा ने आक्रमण का स्वागत किया होता यदि वह सोचता इसने शत्रु को मगध के राज्य को पराजित करने दो बदला लेने की मेरी इच्छा पूर्ण हो जाएगी यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया हो सकती थी मगर उन्होंने ऐसा नहीं सोचा राजा के विचार अलग थे मगध पर आक्रमण है कल वह हमारा भी शत्रु हो सकता है इस संकट की घड़ी में दोनों लोगों ने हाथ मिला लिया और अपनी बुद्धिमानी का परिचय देते हुए विदेशी आगरा आक्रमण को दूर खदेड़ दिया व राजा का नाम था खारवेल भारत के इतिहास में इस कालखंड में अनेक स्वतंत्र राज्य थे अंग मगध कलिंग सातवाहन चोल पांडेय उत्तरापन इत्यादि एक दूसरे से सब किया युद्ध होता ही रहता था जो राजा शक्तिशाली होता था वह कमजोर राज्य पर बार बार आक्रमण किया करते थे मगध में उसमें नंद वंश का राजा का शासन थ वह बड़े शक्तिशाली और प्रभावी थे कलिंग पर आक्रमण किया और उसे हरा दिया कलिंग राज्य में शीतलनाथ जिनकी प्रतिमा थी वहां के जैन इस पर बड़ा श्रद्धा रखते थे मगध ने आक्रमण कर जीत लिया तो मुंह पवित्र मूर्ति को भी उठाकर ले गया इसे कलिंग वासियों को बड़ा आघात हुआ चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र बिंदुसार अपने पिता की मृत्यु के बाद राज्य का राजा बना फिर उसका पुत्र अशोक गद्दी पर बैठा अशोक विशाल साम्राज्य का शासक बना परंतु कलिंग अभी भी स्वतंत्रता या उससे बर्दाश्त नहीं हो पाया राजा बनने के 8 वर्ष बाद उसने आक्रमण किया टर्निंग छोटा राज्य था परंतु उन्हें आत्मसम्मान कूट-कूट कर भरा था उन्होंने युद्ध किया संघर्ष किया पर अशोक के सामने घुटने टेकने पड़े अशोक के शिलालेख भयंकर युद्ध का वर्णन किया गया है अशोक अपने साथ डेढ़ लाख लोगों को बंदी बनाकर ले गया 100000 लोग मारे गए घायलों की संख्या अग्नि थी अनगिनत थी अशोक ने अपनी आंखों से युद्ध की विभीषिका देखी युद्ध के कारण मृत व्यक्तियों की लाशें विनाश और कष्ट हुआ बर्दाश्त नहीं कर सका किसी झरने की तरह रक्त भरा था युद्ध स्थल पर मनुष्य और पशुओं की अनगिनत लाशें बिखरी पड़ी थी हजारों घायलों और मरते हुए लोगों की चीख-पुकार असहनीय थी उसका हृदय बिखर गया उसने निश्चय किया कि मैं आपसे कभी यूज नहीं करूंगा और उसने बौद्ध मत स्वीकार कर लिया चिंटू कर ली किंतु कलिंग ने अपनी स्वतंत्रता को दी अशोक के मृत्यु के बाद उसे साम्राज्य पूर्ण रूप से अव्यवस्था फैल गई उसके पुत्र और पौत्र आपस में लड़ने लगे धीरे-धीरे मगध की शक्ति का प्रभाव घटने लगा अशोक ने विभिन्न साम्राज्य के विभिन्न भागों के लिए सरदार नियुक्त किए उन्होंने अपने शासक की कमजोरी का पूरा लाभ उठाया कलिंग के विजय के बाद अशोक ने चेली के एक सरदार को इसका प्रशासक नियुक्त किया कलिंग में चेदि वंश का शासन ही से प्रारंभ होता है इस संस्था के पुत्र का नाम हुआ महा मेघवाहन सरदार की मृत्यु के बाद महा मेघवाहन गद्दी पर बैठा वह समय कलिंग का सबसे बुरा दिन था भीषण तूफान के कारण अनेकों लोगों की मृत्यु हुई दीवारें नष्ट हो गई शहर को पानी पहुंचाने वाली नहर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई यह बड़ी चिंता थी और इस संकट से कैसे छुटकारा पाया जाए ईसा पूर्व 209 में राजधानी में खबर फैली कि राजा महा मेघवाहन के पुत्र पैदा हुआ है शुभ मुहूर्त था ज्योतिषी को बुलाया गया उसकी कुंडली देखकर भविष्य पूछा गया ज्योतिषियों ने बताया आने वाले समय में यह वंश को प्रसिद्धि दिलाएगा महान शक्तिशाली साम्राज्य का विस्तार करेगा सभी ने आशीर्वाद दिया राजकुमार का नाम खारवेल रखा गया अपने अल्पायु में ही अपनी कौशल का उसने प्रदर्शन करके दिखाया चेहरे में चमक और बलशाली पुरुष युवराज बना तब वह 16 वर्ष का था पिता की मृत्यु के बाद वह देश का राजा बना तूफान के कारण किला ध्वस्त हो गया था उसका निर्माण फिर से उसने कराया जनता में सांस और विश्वास की भावना भरने लगा सशस्त्र सेना की भी तैयारी शुरू की अत्यंत सम्मानित और पवित्र शीतलनाथ जी की मूर्ति किसी भी कीमत पर मगध वासियों से वापस लानी है यह निश्चय किया जैन पंथ को फिर से सशक्त बनाया प्रथम वर्ष में खारवेल ने किले का पुनर्निर्माण अपने हाथ में लिया उसके बाद का पुनर्निर्माण किया अधिकांश मकान ढह गए थे उसे उसने ठीक किया तालाबों और कुओं की मरम्मत भी शुरू हुई इस प्रकार से 1 वर्ष के भीतर खाल खारवेल ने लोगों के दिल को जीत लिया अपने राज्य की सीमाओं का भी उसने विस्तार करना प्रारंभ किया कलिंग के पश्चिम में सातकर्णि नामक राजा था वह बहुत शक्तिशाली था उसके खिलाफ कुछ किया उसकी सेना ने कृष्ण बड़ी बहन गंगा के तट तक जा पहुंची खारवेल डे कृष्णा और नदियों के संगम पर स्थित ऋषि नगर पर आक्रमण किया उस पर भी कब्जा कर लिया इससे उसे खूब यश प्राप्त हुआ संपत्ति भी प्राप्त हुआ खारवेल ने घर लौट कर शानदार तरीके से अपनी विजय की खुशियां मनाई जनता हर्षित हुई 1 वर्ष तक समारोह चलते रहे अपने शौर्य पर गर्व करने लगा क्योंकि सातकर्णि कोई साधारण राजा नहीं था वह राशि और अश्वमेध यज्ञ भी कराए थे उसकी जनता में अधिकांश लोग सेना में शामिल होने की इच्छा से आगे आए राजा विजय की खुशियां मनाने व्यस्त था उसी समय एक समाचार प्राप्त हुआ कलिंग की पश्चिमी सीमाओं पर दो छोटे प्लान थे जिसका शासन रफीक और भोजक नामक दो साधारण सरदार चलाते थे उन्होंने विद्याधर विधास पर आक्रमण करके अपवित्र करने का दुस्साहस किया उसने अपनी सेनाओं के साथ उन पर अचानक हमला बोल दिया दोनों सरदार इस गलतफहमी में थे कि पहले की भांति कलिंग के सिपाही कमजोर है और उसे आसानी से हरा देंगे पर ऐसा हुआ नहीं सरदार खारवेल ने पैरों पर गिर पड़े और दीनता को स्वीकार किया अपना आत्मसमर्पण किया नगर की मरम्मत के लिए काफी ठंडे होना था लेकिन उसने जनता से कोई पैसा वसूल नहीं किया सारा खर्च राज्य को सही किया गरीबी से छुटकारा दिलाने के लिए भी सारे कर माफ कर दिए पराजित सरदारों से प्राप्त धनराशि से खजाना भरा हुआ था खारवेल को राजा बने 7 वर्ष भी चुके थ फिर भी पवित्र जिनकी प्रतिमा अभी मगध के कब्जे में था मगध की राजधानी राजगृह को सीधे घेराबंदी करना संभव नहीं था राजधानी की रक्षा उस के दक्षिण में स्थित गोरख गिरि किले द्वारा की जाती थी यह एक नैसर्गिक पहाड़ी किला था यह पहाड़ी बिहार के गया जिले में है राजधानी पर आक्रमण करने के पहले इस पर कब्जा करना जरूरी था वह एक कठिन और खतरनाक काम था क्योंकि वे सभी मानते थे कि मगध को पराजित कर शीतलनाथ जिनकी प्रतिमा वापस लाना उनका पवित्र कर्तव्य है उनके जीवन का क्या लक्ष्य है इसी संकल्प के साथ उन्होंने गौरव गिरि पर कब्जा किया राजधानी राजगिरी के निकट पहुंचे चारों ओर घेरा डाल दिया जब आक्रमण में खारवेल व्यस्त था तभी उसके पास दो जासूस है उन्होंने सूचना दिया कि महामहिम यूनान का राजा ईमित्र डिमेटरियस भी एक सेना लेकर मगध पर हमला करने आ रहा है जय गंभीर आघात करने वाला समाचार था खारवेल विचार करने लगा ऐसी स्थिति में अब मैं क्या करूं लेकिन उसके मन में देश प्रेम की भावना जगी वह सोचने लगा कि हमारे देश को लूटने आया है वह एक डाकू है मैं एक विदेशी दी मित्र को यहां से भगा लूंगा बाद में मगध से नहीं पड़ता रहूंगा ऐसा उसने संकल्प किया पहले जब उसने सुना कि खारोल मगध पर आक्रमण करने वाला है ईमित्र ने मगध पर आक्रमण करता है और उसी समय में हमला करूंगा तो विजय साहनी से हो जाएगी हम लोग आपस में लूट का माल बांट सकेंगे यह वह सोचने लगा थउसके उसके बाद खारवेल के शासन का 10 वर्ष प्रारंभ हो गया दक्षिण की ओर से ग्रामीण राजा कलिंग को अक्सर परेशान किया करते थखारवेल बहुत दिनों से सोच रहा था कि इंद्र मिनट राजाओं को अच्छा सबक सिखाया जाए धर्मेंद्र सेनाएं मिथुन नामक बंदा ग्रह को मुख्यालय के रूप में प्रयुक्त करती थी पूरी तरह नष्ट कर दिया गया बंदरगाह को गधों से जोर डाला जमीन राजाओं पर हमला बोल दिया उनके संगठन को छिन्न-भिन्न कर दिया खारवेल अपना अधूरा कार्य पूरा करने के लिए उत्तर की ओर घटा उसने तक्षशिला की राजधानी उत्तरा पति और कुछ किया और उस पर कब्जा कर लिया फिर मगध की सेना की ओर बढ़ी मगध के राजा व्यास प्रति मित्र तक पहुंचा भारत में घुसकर उनके स्थानों पर मनमानी लूटपाट करने वाला या 1 राजा ईमित्र को भगाने वाला महान योद्धा खारवेल ही था बीएस पति मित्र ने खारवेल को संदेश भेजा कि उस से भेंट करना चाहता है और उसने कहा कि हम मगध के लोग जानते हैं गलती हमारी है हमारे पूर्वज कलिंग से अपवित्र मूर्ति ले आए थे हमने जो कुछ किया वह गलत था ऐसा कहकर उसे प्रतिमा लौटाया खारवेल शीतलनाथ जी प्रतिमा के साथ अपने देश वापस लौटा शानदार मंदिर का निर्माण किया गया कलिंग एक छोटा दिन गरीब और सम्मान भी राज्य रह गया था अब दिन और शक्तिशाली विशाल साम्राज्य बन गया था उत्तर में तक्षशिला नेपाल से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक फैली हुई थी खारवेल का अर्थ होता है तूफान होता है फाेरवेज जिसने कि अब सम्राट को प्राप्त कर लिया था जैन पंच को शक्तिशाली बनाने का विचार किया और भारत में सभी और पौध क्या पता नहीं चला कि शक्तिशाली सम्राट के अंतिम दिन किस प्रकार भी थे की शक्ति और प्रभाव में अंग्रेजी में

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