गौतम बुद्ध

प्राचीन समय की बात है शाक्य गणराज्य का शुद्धोधन राजा थे मायावती और गौतमी से उनका विवाह हुआ था एक बार आषाढ़ पूर्णिमा की रात मायावती अपने महल में मनचक पर गाड़ी निद्रा में लीन थी नींद नहीं उसके चेहरे पर भी नवीन भाव के रजिस्ट्री कोचर हो रहे थ वह नींद में स्वप्न देखने लगी जब सपना समाप्त हुआ बोर हो चुकी थी स्वप्ना देखकर व प्रसन्नता का अनुभव कर रही थी सपने में उसने देखा एक छोटा हाथी सुब्रमण्य का पहाड़ से उतरकर मेरी ओर आने लगा जैसे-जैसे वह मेरे निकट पहुंचने लगा मुझे तो उसका डर लगने लगा उस हाथी के स्कूल में एक पेज कमल था अपना पहाड़ सा विशाल रूप त्याग करेक्शन सुषमा होकर मेरी दाहिनी और कोख में प्रविष्ट हुआ कुछ दिन बाद रानी ने गर्भधारण किया और 9 माह पूरे होने पर राजा ने उसने पीहर भेजने का प्रस्ताव दिया राजा ने त्वरित रूप से पीहर भेजने की व्यवस्था की मायावती का पिया था खोलिए राजा का देवत नगर कपिलवस्तु और देवत के बीच लुमिनी नामक एक रमणीय उपवन था वह पहला पड़ाव था वहीं पर मायावती को तीव्र प्रसव वेदना का अनुभव हुआ उस ने एक बालक को जन्म दिया राजा मायावती को कपिलवस्तु वापिस ले गया बाल आपका नामकरण सिद्धार्थ ईसा पूर्व 557 साल की है घटना है सभी प्रसन्नता से भर आया मायावती का द्वार बढ़ने लगा उसने गौतमी को बाला को सौंपते हुए अपना देह त्याग दिया गौतमी कभी एक पुत्र था नंद सिद्धार्थ चार-पांच माह छोटा था दोनों के 8 साल पूरे होने पर शुद्धोधन ने उन्हें विश्वमित्र नाम के गुरुकुल आश्रम में अध्ययन के लिए भेजा शीघ्र ही शास्त्र विद्या व शस्त्र विद्या में प्रवीण हुए 12 वर्षों में उन्होंने अध्ययन समाप्त किया 21 22 साल के होनहार नवयुवक के रूप में वह घर लौटे सब विद्या में परिपूर्ण होने के बाद भी सिद्धार्थ का मन युद्ध शिकार विला शादी में नहीं रहता था वह प्रतिपल किसी गहरे चिंतन में डूबा रहता था उसका यह स्वभाव बदलने के लिए राजा ने सिद्धार्थ को दुख का अभाव आभासी ना हो ऐसी व्यवस्था राज्य प्रसाद और बाहर भी कर रखी थी शुद्धोधन सिद्धार्थ विवाह को लेकर चिंतित थे उन्हें उत्तराधिकारी के रूप में भी सताने लगी सिद्धार्थ युवराज था शुद्धोधन के बाद उसे ही शासन संभालना था सिगरे शुद्धोधन ने सुपर बुद्ध नामक सरदार से उसी करने यशोधरा के लिए प्रस्ताव भेजा लेकिन लड़की ने स्वयंवर रचा छात्र देश का प्रमाण मांगा सिद्धार्थ होश में निपुण हुए और विवाह तय हो गया एक दिन सिद्धार्थ को कपिलवस्तु नगरी के दर्शन की इच्छा हुई जिन सड़कों से उन्हें गुजारना था वह पथ सुशोभित करने के आदेश दिए गए राजा की आज्ञा से बूढ़े भिखारी रोगी कोई भी दुखी व्यक्ति सड़क पर ना दिखे ऐसा बंदोबस्त किया गया फिर भी आने वाले 4 दिनों में सिद्धार्थ ने बूढ़ा व्यक्ति एक रोगी और अंत्यात्रा को देखा देख करके वह गहरी चिंता में डूब गया 4 दिन से राज्य प्रसाद से बाहर निकला तो काफी दूर रह गए रास्ते एक किनारे एक जामुन का वृक्ष था उसके नीचे कोई खड़ा था सिद्धार्थ ने उसके साथी को 6 को उसके बारे में पूछा था क्षण में ने कहा युवराज वह तो एक सन्यासी है परिव्राजक है सिद्धार्थ सन्यासी के निकट वंदन करते हुए उसने सन्यासी से पूछा महाराजा पैसे सन्यासी क्यों बने सन्यासी ने कहा मैंने अनुभव किया इस सृष्टि में कोई भी वस्तु कायम नहीं है और जीवन प्रारंभ से अंत तक दुख से ग्रस्त है इसलिए मैंने घर बार लड़के बच्चे पत्नी सभी को छोड़ दिया है और धर्म चिंतन में लगा रहता हूं यथासंभव दूसरों की मदद भी करता हूं अपनी सारी इच्छाएं मैंने त्याग दी है और चिरंतन सुख की प्राप्ति की खोज में लगा रहता हूं सिद्धार्थ इन उस सन्यासी से और भी अनेक बातें सीखी सिद्धार्थ ने मन ही मन निर्णय लिया कि यदि शासन है तो मुझे भी घर छोड़ना होगा युवराज को बदले हुए तेवर देखकर चंद्र करत राजा प्रसाद की दिशा में मोड़े सिद्धार्थ को कुछ दिन बाद ही पितृत्व प्राप्त हुआ यशोधरा ने एक शिशु को जन्म दिया पांचवें दिन बालक का नाम राहुल रखा गया नामकरण के अगले दिन सिद्धार्थ पिता को मिलने गए शुद्धोधन ने हंसते हुए पूछा सिद्धार्थ आज अचानक यहां महल में कैसे आए जनता के साथ सिद्धार्थ ने कहा पिताश्री मैं आपके पास घर छोड़ने की अनुमति मांगने आया हूं शुद्धोधन को सिद्धार्थ की बात ध्यान में नहीं आई सिद्धार्थ ने फिर से का पिताजी मैं एक बालक का पिता बना आप पिता महा बने अपने माता-पिता के ऋण से मुक्त हो गया हूं मुझे आप इस संसार छोड़ने की अनुमति दें शुद्धोधन ने पूछा लेकिन क्यों उत्तर को जन्म देकर ही जिम्मेदारी नहीं चलती तुम्हारी जिम्मेदारी है अभी आगे और बढ़ गई है उसने कहा एक शर्त है तभी मैं हर रुक सकता हूं आप मुझे वृद्धि एवं मृत्यु से मुक्ति दिलाई है मेहर हूंगा शुद्धोधन ने कहा कैसी अनाड़ी बातें तू बोल रहा है या तो निसर्ग का करम है उसे क्या कोई बदल सकेगा सिद्धार्थ ने आखिरी बार का ठीक है आप मेरे लिए मेरा रास्ता खुला है उसी दिन देर रात में सिद्धार्थ जाग गया सारा परिसर पशु पक्षी वृक्ष लाता गहरी नींद में लीन थे बाहर निकलने के लिए ही बेला उपयुक्त है ऐसा विचार कर वह महल से बाहर निकला जहां सिद्धार्थ का प्रिय ब्रितम सारथी छंद सो रहा था सिद्धार्थ ने उसे जलाकर बड़ी लंबी दूरी की यात्रा के लिए घोड़ों को तैयार करने को कहा फिर किस कारण नहीं कहा जा सकता सिद्धार्थ को पुत्र राहुल का स्मरण हुआ उसे देखने का यशोधरा के महल में गया यशोधरा उसे कोमल शिशु को कोक मिलिए सोई थी यशोधरा कहां दूर कर बालक को उठा ले एक बार उसे चूम ले सिद्धार्थ को लगा अपना दाहिना हाथ उसने बढ़ाया भी फिर उसे ध्यान आया कि यशोधरा की नींद खुल सकती है जगने पर प्रश्नों की झड़ी लगाकर प्रस्थान के मार्ग में बाधा खड़ी करेगी तब उसने राहुल को हाथ लगाने का विचार छोड़ दिया वह दवे कदमों से वहां से बाहर निकला राजभवन के बाहर छंद सिद्धार्थ के प्रिय अश्वगंधा को सिद्ध कर खड़ा था सिद्धार्थ घोड़े पर सवार हुआ वह दोनों अनोमा नदी के किनारे पहुंचे सिद्धार्थ ने क्षण को कहा कि तुम कपिलवस्तु को लौट जाओ सभी से मेरा प्रणाम कहना और बताना कि किसी पर गुस्सा होकर नाराज होकर मैंने घर नहीं छोड़ा है परंतु राजा अब जाएंगे कहां ऐसा चंदा ने पूछा की सामान्य आदमी के समान होकर मैं सत्य की खोज में आगे बढ़ रहा हूं मेरी खोज पूरी होने पर मैं सभी से मिलूंगा सिद्धार्थ ने कहा हम तुम्हारी तलवार मुझे दो चंद ने तलवार देते सिद्धार्थ ने उसके तलवार से अपने सर को मुंडन कर बाल फेक दिए पास से एक शिकारी जा रहा था उसने पुराने वस्त्र लेकर रेशम के नरम वस्तु शिकारी को दे दिए अपने सारे अलंकार नीला निकालकर सिद्धार्थ निगम को सौंपा सिद्धार्थ का विकसित रूप देखकर के रोने लगा सिद्धार्थ चलते हुए वहां से दूर निकल गया चंद की दृष्टि से ओझल हो गया मन मारकर क्षण 7 दिनों के बाद कपिलवस्तु लौटा उसने सारी घटना का ब्यौरा दिया सारी नगरी में शोक छा गया शुद्धोधन तथा यशोधरा का जीवन की धारा ही छूट गया मगध प्रदेश में सिद्धार्थ औलाद कलाम इस वेद शास्त्र संपन्न ब्राम्हण के संपर्क में आया उसे सिद्धार्थ ने अपना गुरु बनाया वेद उपनिषद समाधि विद्या का ज्ञान उससे सिद्धार्थ ने प्राप्त किया परंतु फिर भी उसका मन संतुष्ट नहीं हुआ रुद्रा के राम पुत्र आचार्य से भी उन्हें अधिक ज्ञान की प्राप्ति हुई वहां सिद्धार्थ को कौंडिल्य वर्क भद्रीय महा नाम तथा अश्वजीत या पांच गुरू बंधु मिले वह 6 लोग एक साथ होकर अधिक ज्ञान प्राप्त करने आगे चल परंतु कोई योग्य गुरु के अभाव में सिद्धार्थ ने गया सिर्फ पर्वत पर बैठ अधिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए कठोर तप करने की ठानी वहां निरंजना नदी के किनारे सेना निगम पहुंचा साथ में पांच गुरू बंधु भी थे उग्र हठयोगी तब के फल स्वरुप सिद्धार्थ करते हैं अधीक्षण हुआ वह मृत्यु के दिल्ली पर मानव खड़े हुए फिर भी शांति समाधान प्राप्त होने की कोई चिंता नहीं दिख रहे थे सिद्धार्थ के ध्यान में आया कि देने को कष्ट देने से कुछ लाभ नहीं समाधि अवस्था पानी है तो फिर से अन्न ग्रहण करना होगा नदी में जाकर भाई स्नान करने लगे परंतु दुर्बलता कारण जमीन पर गिर पड़े पास में ही रहने वाली गोरिया की पुत्री नंदिनी आदेश देकर करुणा बस उसे दूध भात खिलाया सिद्धार्थ को अच्छा लगा वह प्रतिदिन थोड़ा सा भोजन करने लगा यह देख कर उसके साथ ही ग्रुप बंधुओं ने सोचा सिद्धार्थ का पतन हो गया शरीर को वृथा कास् उन्होंने मध्य मार्ग का चयन किया भी नहीं तथा अनावश्यक आराम भी नहीं 1 दिन वहां कालाकालु टमाटर विकास उसके समूह का खड़ा हुआ मारने रति आरती सुधा कृष्णा आलस्य भय संदेह अलंकार लोग सम्मान पूजा आकृति ऐसे 10 प्रकार की सेना लेकर सिद्धार्थ पर चढ़ाई की सेना निगम के सीमावर्ती निरंजना नदी के किनारे की विशाल पीपल के वृक्ष के लिए उसने आसन रचा सिद्धार्थ ने जो ज्ञान प्राप्त किया उसे ही संबोधी कहते हैं यह संबोधी माने ही चार आर्य सत्य उसमें दुख यह प्रथम दुख समुदाय दूसरा दुख विरोध तीसरा तथा दुख निरोध गामिनी प्रतिपदा यह चतुर्थ अंतिम आर्य सत्य है जिस पल के वृक्ष के तले उन्हें ज्ञान प्राप्ति हुई उस वृक्ष को बोधि वृक्ष संज्ञा प्राप्त हुआ ज्ञानानंद का आस्वादन करते हुए भूत उस पीपल के तले 7 दिन बैठे रहे 50 दिन बुद्ध ने अन्य पानी ग्रहण नहीं किया प्रफुल्लित हुए भूतों को लगा कि प्राप्त ज्ञान किसी प्रबुद्ध व्यक्ति को कहना चाहिए किंतु औलाद कलाम रोधक राम पुत्र की मृत्यु हो चुकी थ फिर वह तो को अपने ग्रुप बंधुओं का स्मरण हुआ उनकी खोज में बहुत काशी के निकट सारनाथ के मृग वन पहुंचे अपने ज्ञान प्राप्ति की हकीकत भूत ने उन्हें सुनाई परंतु गुरु बंधुओं को विश्वास नहीं हुआ बुद्ध ने कहा मेरी बात तो सुन लीजिए तब वह सुनने को राजी हुए बुध ने उत्तर दिया जिसे जन्म मृत्यु के फेरे से मुक्ति पाना है उसने अति भी सहयोग योग्य आराम से रहना चाहिए दूर रहना चाहिए जिनको ज्यादा कष्टदायक कठिन श्रम भी डालना चाहिए इन दोनों अति को टालने वाला मध्यम मार्ग मैंने पूछा है यह कहकर बुद्ध ने चार आर्य सत्य में समझाएं पांचवें ने बुद्ध का शपथ ग्रहण किया सारनाथ में बुद्ध ने जो कथन किया वही प्रथम धर्म प्रवचन कहा जाता है यही से धर्म चक्र प्रवर्तन यानी धर्म का प्रचार प्रारंभ हुआ अग्नि शाला में उन्हें स्थान दिया बुद्ध बुध की कृति सर्व दूर पहुंची लोग उन्हें भगवान बुध इस उपाधि संबोधित करने लगे राजा बिंबिसार को भी यह जानकारी मिली उनके दर्शन के लिए पधारे बिंबिसार ने भी समुद्र का सशक्त स्वीकार किया उज्जैनी का महाकाव्य आयन या दो विद्वान ब्राह्मण भी विकसित संघ में शामिल हुए बुद्ध के उपदेश के कारण हजारों युवक होने लगे उसे कारण तो अनिष्ट कारी परिणाम दिखने लगे कई परिवारों का आधार ही नष्ट हो गया ऐसे परिवारों को बड़े कष्ट सहने पड़े बुद्ध का उपदेश सभी के समझ में ठीक से आया था ऐसा भी नहीं था जो कोई अपनी समझ के अनुसार बुध के वचनों को बदल रहा था इस कारण बिछुआ में मनमुटाव दिखाई देने लगा चारों और अव्यवस्था मनमानी का माहौल बन गया भगवान बुद्ध के ध्यान में जब यह सारी बातें पहुंची तब उसने सभी बौद्ध भिक्षुओं की एक सभा की बिच्छू संग में अनुशासन लगाने के लिए आचार्य अध्यापक शिष्य सभी के लिए कुछ नियम बनाएं उसका मूल नाम अनाथ पिंड 5883 ढकने राजगिरी में भगवान बुध से दीक्षा ली और भिक्षु संघ में दाखिल हुए एक प्रसिद्ध व्यवसाई का पुत्र था बादशाह बुद्ध ने कहा कि किसी को काम धंधा घर परिवार छोड़ना क्या पक्का नहीं है जेल में जन्म लेकर भी कमल पुष्पों जैसे जल में अली तरह था वैसे ही मनुष्य संसार में रहना चाहिए बुद्ध का उपदेश सुनकर अनाथ प्रिंटर को आंतरिक समाधान मिला वस्त दोनों ने मिलकर भगवान भूत के निवास आर थे क्रम में स्थान का चयन किया यह स्थान था जेट नामक राजपूत्र का रमणी उद्यान अनाथ विंड अपने वजह से खरीदना चाह र जितने कहा ठीक है लेकिन जो सारी जमीन खरीदना चाहते हैं इतनी सारी जमीन को स्वर्ण मुद्राओं से ढकना होग तभी वह जमीन में तुझे भेजगा अनाथ पिंडा कुछ परिणाम में सोना देने को प्रस्तुत हुआ अनाथ प्रिंटर की अपार धन संपदा पु देख जैत विस्मित हुआ अपना उद्यान तो भेजूंगा ही तथा मेरे अपने योगदान के रूप में मैंने तुझे भूमि भेजूंगा ऐसा उसने तय किया अपना पुत्र सिद्धार्थ आप सभी लोगों के बीच में भगवान बहुत इस आदर युक्त नाम से प्रसिद्ध हुआ है ऐसा वार्ता सुनकर शुद्धोधन वह बहुत खुशी हुआ और उसे एक बार देखने की तीव्र इच्छा शुद्धोधन में जगी तब शोधन की आयु 95 96 साल की हो गई थी पक्का पीले पड़ गए पत्ते के समान उनकी अवस्था हो गई थी त्र के साथ श्रावस्ती आया कालू ताई ने शुद्ध तन का संदेश पहुंचाया तथा शुद्धोधन आवती वृद्ध होने कारण भगवान खुद ने देरी ना करते हुए कपिलवस्तु पहुंचना चाहिए यह प्रार्थना की भगवान बुद्ध ने उसका पालन किया भगवान बुध दौरा करते हुए कपिलवस्तु के समीप पहुंच गए शुद्धोधन उन्हें मिलने गए भगवान बुद्ध ने आलिंगन दिया भूत की इच्छा अनुसार सभी नया गोधरा में गए वहां उच्च आसन पर आसीन होकर खुद ने सभी को थोड़ा उपदेश दिया अगले दिन भगवान बुद्ध ने राजधानी कपिलवस्तु में प्रवेश किया भगवानपुर अब सीधे राजमहल में राजभवन में गए सभी ने उनका दर्शन करने वंदन किया परंतु उनकी पत्नी यशोधरा उन्हें भेंट करने नहीं आई उसके मन में बहुत कटुता थी बिना बताए बिना कुछ सोच विचार किए 56 दिन पूर्व जन्मे शिशु को छोड़कर उन्होंने निर्मम होकर वह चले गए इसके लिए उनके मन में शौक था बाद में यशोधरा से मिलने स्वयं बुद्ध गए शुद्धोधन ने बुध से कहा सिद्धार्थ तेरे गिरिजा के बाद विगत 7 वर्षों से यशोधरा भी व्रत स्थल ही है अनेक राजपूत्र उसके साथ विवाह करने आगे आए परंतु यशोधरा ने उसे सुना भी नहीं मैं सिद्धार्थ की ही धर्मपत्नी हूं यही उसका उत्तर था आने वाले दिनों में बुध का सौतेला भाई आनंद चचेरा भाई देवदत्त आदि सभी निरीक्षण की दीक्षा ग्रहण की भगवान बुद्ध ने राहुल को भी 8 वर्ष की आयु में दीक्षा दी किंतु महिलाओं को भिक्षु संघ में शामिल करने के विषय में भगवानपुर उदासीन थे 8 साल की आयु में राहुल को दीक्षा दी गई है बस उनका शुद्धोधन कुछ विचलित हुए यशोधरा नवे भिक्षु संघ में प्रवेश करने की इच्छा प्रदर्शित की बाद में उन्हें शामिल कर लिया गया मगध देश के शासन बहुत गर्मी थे बहुत धर्मी थे एक बार प्रदेश में महामारी का प्रकोप हुआ लोग मरने लगे किसी को भी अपने जीवन की सा बस्ती नहीं रही इस कारण कोशिशों का मन कुमला गया कुछ चैन छंद छंद के पीछे लिखते हुए इसे दे भगवान बुद्ध ने शिक्षकों को रुकना सेवा का आदेश दिया शिष्यों ने अपनी जान हथेली पर लेकर पीड़ितों की सेवा की उन्हें हिम्मत दी दवा पानी किया बौद्ध धर्म में धर्म दिक्षित युवकों को उपदेश करते भगवान खुद ने कहा आप समय का व्यवहार सत्संग के लिए करें सदैव धर्म की चर्चा करें शेयर करें श्रम धर्म का वर्णन करते हुए सत्य ज्ञान का लाभ प्राप्त करें बुद्ध के पुत्र राहुल ने दीक्षा ग्रहण की थी फिर उसका व्यवहार कुंडा का था इस कारण खुद ने उसे उपदेश दिया राहुल एक बर्तन में जल लाकर मेरे पैर पर डालो राहुल ने पैर धोने के बाद दूध से परीक्षा किस बर्तन में बचा हुआ जल पीने योग्य होगा क्या राहुल ने कहा नहीं सबूत बोले इसके साथ दो परिस्थिति का मूल्यांकन कर दो कर भी जवान पर नियंत्रण हो गया है ठीक है अब इस जल पात्र फेंक दे राहुल ने कहा अब यहां पात्र हुआ क्या राहुल ने कहा नहीं तब उसने कहा इसी प्रकार जब तक बिक चुके पीत वस्त्र धारण करते हुए भी तेरा चित्र है तब तक तो उच्च कर्तव्य करने का पात्र है राहुल बोला नहीं क्योंकि मैं वह मिट्टी का बना हुआ फूटने से बड़ी हानि तो होगी नहीं अपने देश के प्रति भी यही भाव रखो तथा संयम का पालन करो वहां चमन से पवित्र बनो इसके बाद राहुल के बिहार में कुछ सुधार आया भगवान बुध हुए थे बेकार हो गया था जानकारी मिलते ही उसने आमंत्रण दिया चावल की रोटी के साथ किसी ने पूजन किया परंतु उनके कारण उन्हें निश्चित कर डाला वह 5 साल वृक्ष के तले उनके फूल वृद्धि के बुद्ध के शरीर पर गिर रहे थे वह देखकर गंभीर अवस्था में भी बुध आनंद से कहा आनंद अब मैं चला आंखें मूंदकर बुध ने ध्यान लगाया थोड़ी ही देर बाद शरीर निस प्राण हुआ बुध अपना शरीर छोड़ चुके थे अंतिम अपनी अंतिम बेरा निकट आई है यह जानकर भूत ने ध्यान में आया तथा उन्होंने आनंद से खाकर वैशाली के परिसर में विद्यमान अन्य सभी शिष्यों को पास बुला लिया सभी शिष्य पास होने पर बुद्ध ने कहा मैंने अब तक जो धर्म का प्रतिपादन किया उसका आप चारों और जाकर प्रचार करें शिष्यों के आग्रह पर बुद्ध ने अपने धर्म तत्वों को दोहराते हुए कहा आप मेरे धर्म के चार स्थान हैं काया पवित्र है यह विचार सदैव मन में जागृत रहे यह प्रथम काया नू दर्शन उपर स्थान है शरीर सुख में रमण या दुख का कारण है या दूसरा वेद नानू दर्शन उपर स्थान है चित्त की चंचलता का सदैव स्मरण चिता नु दर्शनीय तीसरा स्थान है अंत में संसार के सभी पदार्थ नाशिवंत है या चांठामाणु दर्शन उपर स्थान है ऐसे भगवान गौतम बुद्ध उनका बौद्ध धर्म भारत के लिए गौरव का विषय है

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