छत्तीसगढ़ हीरो

बैरिस्टर छेदीलाल

बैरिस्टर छेदीलाल के पूर्वन राजस्थान के राजपूत सिपाही थे। कहते है कि एक समय राजस्थान के लोग यहाँ ॐठ सामान लादकर व्यावसाय करने आते थे। अच्छी लाभ कमाकर वापस भी चले जातये कभी उनके साथ राजपूत सिपाही भी आया करते थे। छ.ग. की वनसंपदा हरियाली को देख कर यहीं वस जाते थे। इनका परिवार 1850 के आसपास यहाँ (बिलासपुर) आकर बस गया! तब रायगढ़, शक्ति, सारंगढ़, खैरागढ़, भटगांव, हुरी, चन्द्रपुर बिरी, पंडरिया, कोरबा जैसे जमी दारियां यहाँ थी। आपस में लड़ाईयाँ भी होती रहती थी। बिर्रा जमीदार का झगड़ा पड़ोसी, जमीदार से हो गया। राजस्थानी राजपूत सिपाहियों ने बिरा जमीदार की ओर से युद्ध मे भूमिका निभाई बाद में उसनें इनकों बसने के लिए जमीन, पुरुस्कार स्वरूप कुछ गाँव दिये। संभवतः अकलतरा के आसपास बस गयें। सरदार सिंह व गरुण सिंह ये दो भाई थे। गरुणसिंह के बेटे पचकौंड सिंह हुए इन्ही के बेटे हुए छेदीलाल सन् 1891 में जन्म हुआ। प्रायमरी की शिक्षा लेकर बिलासपुर रायपुर में मैट्रिक हुए। 1908 में हीरादेवी के साथ विवाह हो गया। 1914 में आक्सफोर्ड से MA और बार एट लॉ की डिग्री इंग्लैंड से प्राप्त की। वे छ.ग. के प्रथम बैरिस्टर थे। इंग्लैंड में ही पं. नेहरूव सुभाष चंद्र बोस से अच्छी मित्रता थी। बैरिस्टर बनकर आने के बाद 1915 में गुरुकुल कांगड़ी में अध्यापक रहे। 1916 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर रहे। 1919 में अकलतरा के आसपास रामायण मंडली, का गठन कर उसका संयोजन करते रहे। 1920 में सबसे बड़ा कार्य उन्होंने किया कि ग्राम खिसोरा में गुरु अंजोरदास -Prabodh

और गुरु अगमदास सहित सैकडो सतनामी बन्धुओं को जानेक पहनाया। पं. मदनमोहन मालवीय जी के साथ मिलकर सेवा अर्थ किया।

1930 में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गये जिसक

कारण उनकी बळावत पर प्रतिबंध लगा डिग्री छीन ली गई 1931 से 1351 तक महाकोशल प्रांतीय कांग्रेस कमेरो के अध्यक्ष रहे। मङ नग्रेस कमेटी नागपुर अधिवेशन 1933 में अध्याक्ष रहे। कहते है 1937 में महात्मा गांधी ने उन्हें वर्धा दुलकर कहा था कि cpard Basar प्रदेश को मुख्यमंत्री बनज़र वे प्रदेश की सेवा करें तब बंड विनम्रता से इस अस्वीकार कर दिया। महात्मा जी ने कारण पूछा तो कहा है इसे कम आय में बिनसपुर का घर ही नहीं संभल रहा

तो जैसे दो दावित्वों का निर्वाहन कर सकूँगा। में मुख्यमंत्री रहते हुए ईमानदारी से रहूँगा लंदकंद की कमाई कभी नही करूंगा तो खर्चा चलाना असंभ हो जायेगा। गाँधी जीने हँसते हुए उनका पीठ फेरा,

सरदार वल्लभभाई पटेल भी इनको दुखमंत्री बनाना चा पर मना कर दिया तब उन्हीं से उनका पसंद वाला नाम पूछा तो 4 रविशंकर जी मुख्यमंत्री चुने गये।

एक वैरिस्टर छेदीलाल जी हग के उन महान ि में शामिल है जिन्होंने इन्ग का स्वप्न देखा था। ऐसी व्यक्तित्व को सभी का नमन।


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