आदर्श रसोई स्वस्थ परिवार का आधार
वर्तमान समय में रसोई की अव्यवस्थता परिवारों में अनेक बिमारियों का कारण बन रही है। आप अपनी रसोई को आदर्श रसोई के रूप में स्थापित कर निश्चय ही अपने परिवार को अच्छा स्वास्थ्य प्रवान कर सकते हैं।
आदर्श रसोई बनाने हेतु अनिवार्य बिन्दू :
1. स्वच्छता
* भोजन पकाने से पहले हाथों को अवश्य साफ करें।
* सब्जी काटने से पहले पानी में आधा चम्मच हल्दी डालकर धोयें।
* बर्तनों एवम् उपकरणों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
* कीटाणु मुक्त रखने एवम् पोषक तत्व बरकरार रखने हेतु ज्यादा समय से कटी हुई सब्जी का प्रयोग न करें।
2. रसोई में प्रयोग करने योग्य बर्तन एवं उपकरण
* एल्युमिनियम एवम् नॉनस्टिक का प्रयोग न करें।
* एल्युमिनियम बोक्सीएद का बना होता है, ये भोजन में से आयरन व कैल्शियम को सोख लेता है, जिससे हड्डियां कमजोर, मानसिक बीमारी, लिवर और नवेस सिस्टम को हानि पहुँचती है।
* एल्युमिनियम के बर्तन में खाना बनाने से भोजन के 87% पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
* एल्युमिनियम की तरह ही नॉनस्टिक बर्तन भी इंसानी शरीर के लिए बेहद खतरनाक है।
*इन हानिकारक बर्तनों के विकल्प के रूप में मिट्टी, स्टील, पीतल, लोहा एवं काँसे के बर्तन का प्रयोग करें।
* भगवान की रसोई में जो खाना सूर्य की रोशनी में पकता है, वह सर्वोत्तम है।
3. विरूद्ध आहार स्वास्थ्य के लिए अभिशाप
*दूध के साथ फल खाना।
* दूध के साथ खट्टे अम्लीय पदार्थ का सेवन ।
* दूध के साथ नमक वाले पदार्थ भी नहीं खाने चाहिए।
*गेहूँ को तिल तेल में पकाना।
वहीं, शहद के बाद गर्म पदार्थो का सेवन ।
केले के साथ वहीं लस्सी लेना।
*ताम्र चूड़ामणि के साथ दहीं का सेवन ।
ताँबे के बर्तन में घी रखना।
मूली के साथ गुड़ खाना।
* मछली के साथ गुड़ खाना।
* तिल के साथ कॉजी का सेवन ।
*चाय के बाद ठंडे पानी का सेवन।
* फल और सलाव के साथ दूध का सेवन करना।
* मछली के साथ दूध पीना।
खाने के एकदम बाद चाय पीना (इससे शरीर में आयरन की कमी आ जाती है)
उड़द की दाल के साथ वही या तुअर की दाल का सेवन करना (बही-बड़े वास्तव में विरूधाहार है)
* सलाद का सेवन मुख्य भोजन के बाद करने से सलाद को पचाना शरीर के लिए मुश्किल हो जाता है और गैस तथा एसीडीटी की समस्या उत्पन्न होती हैं।
4.
रसोई में प्रयोग होने वाले मसालों का औषधीय उपयोग
1. अदरकः बुखार, खाँसी, सिर दर्द, गर्भावस्था के दौरान उल्टी का दिल करना, माहवारी के दर्द में लाभदायक।
2.
हल्दीः सोजिश को घटाने में, गैस, घी, तेल को पचाने में, खून को पतला करने में तथा एलर्जी एवम् जोडों के दर्द में लाभदायक।
3
. लहसूनः कोलस्ट्रॉल घटाने में, खून को पतला करने में, एन्टीफंगल, वायरल, बुखार एवं जोड़ो के दर्द में लाभदायक।
4. अजवायनः पेट दर्द, खाँसी, फ्लू, जोड़ो के दर्द में लाभदायक ।
5. लौंग : जलन, उल्टी, प्यास, खाँसी, साँस की तकलीफ, हिचकी, चमड़ी रोगों में, लौंग का तेल, गठिया, पीठ दर्द में मालिश, दाँत का दर्द व दाँत के कीड़े में लाभदायक।
6. काली मिर्चः जुकाम, खाँसी, साँस लेने में तकलीफ, खाना न पचना, दाँत दर्द, दाँत में कीड़े, चर्म रोगों में लेप या तेल में मिलाकर लेप फुंसियों पर लेप, बात बिकार, ठण्ड से होने वाला बुखार, माहवारी बन्द होना, पेशाब की तकलीफ में लाभदायक।
7. मेथी : शूगर, बुखार, भूख न लगना, खाँसी, मोटापा, माहवारी बन्द होना, दूध बढ़ाने में लाभदायक।
8. हींग: गैस, पेट दर्द, वायरल बुखार, स्वाइन फ्लू, बैक्टिरिया इन्फेक्शन में लाभदायक।
9. जीरा। उल्टी, खाना न पचना, अफारा, पेट वर्द, बार-बार शौच जाना, बवासीर, पेट में कीड़े होने पर जीरा भुनकर चूर्ण शहद के साथ, मूत्राघात (पेशाब में तकलीफ) गुर्दे की पत्थरी में जीरें का चूर्ण चीनी या मिश्री के साथ, दूध को बढ़ाने के लिए गुड़ के साथ लाभकारी।
10. धनिया: गैस, प्यास की अधिकता, सिर वर्व, उल्टी का दिल करना, मुँह के छालों में लाभदायक।
11. सौंफ: उल्टी, पेट वर्व, नींद न आना, सिर वर्व, गले की जलन में, दिमाग को ताकत देने में एवम् स्मरण शक्ति को बढ़ाने में लाभदायक।
12. बालचीनी: अपच, गैस, फ्लू, खाँसी, जोड़ों का दर्द, पोस्ट इन्फैक्शन, शुगर एवम् कोलेस्ट्रोल में लाभदायक।
5. इन चार जहर का रसोई से करें बहिष्कार
1. सफेद नमक : सफेद नमक बेहद नुक्सानदायक हैं। इसका
अधिक सेवन भी ब्लड प्रैशर को बढ़ाता है, अगर आप अपने बालों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखना चाहते हैं तो सफेद नमक का इस्तेमाल न करें। सफेद नमक का ज्यादा सेवन वजन बढ़ने एवम् पसीना अधिक निकलने के लिए जिम्मेदार होता हैं, अगर आपने सफाई पर ध्यान नहीं दिया तो यह त्वचा रोग और इन्फैक्शन भी दे सकता है, जिसका असर आपके रक्तवाहिनियों के फेंकने के रूप में दिखाई दे सकता हैं।
. सफेद चीनी: चीनी का प्रयोग आपके लिए वैज्ञानिक और 2
धार्मिक दोनों प्रकार से हानिकारक हैं। चीनी का निर्माण और प्रयोग भारत में अंग्रेजों ने शुरू करवाया था। इसके निर्माण में 20-20 खराब रसायनों का प्रयोग होता है जो आपके शरीर में अम्ल अर्थात् एसिड बनाती है और हमारे पेट और पाचन क्रिया में अनेक विकार पैदा करते हैं, मधुमेह रोग पैदा करते हैं। अधिकतर मिलों में चीनी को हड्डियों से पोलिश किया जाता है वर्ना इसका रंग सफेद न हो पाए। भारत में पहले इसके स्थान पर गुड़, शक्कर, देशी खांड का प्रयोग करने पर शुगर जुकाम और पेट के अनेक रोगों से बच सकते हैं क्योंकि इनसे अम्ल नहीं बनता और ये अनेक रोग ठीक करने की क्षमता रखते हैं।
3. मैदा : मैदा बनाते समय गेहूँ के ऊपरी छिलके को हटा दिया जाता है जिससे उसका फाइबर निकल जाता हैं। इसके सेवन से अक्सर कब्ज की समस्या आती है साथ ही मैदा बहुत अधिक मात्रा में तेल सोखता है, अधिक मात्रा में तेल के सेवन से भारीपन बना रहता है एवम् मैदा के ज्यादा सेवन से पेट बिगड़ जाता है।
4.
रिफाईन्ड : रिफाईन्ड तेल का प्रयोग हदय रोग, मधुमेह और कैंसर को न्यौता देता है। इसे गन्ध रहित, स्वाद रहित व पारदर्शी बनाने के लिए कई तरह के रसायनों का प्रयोग किया जाता है, जिसमें से कास्टिक सोडा, फास्फोरिस एसिड, ब्लीचिंग कलेज आदि प्रमुख हैं।
आदर्श रसोई अपनायें
बिमारियों को दूर भगायें
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